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डोर टू डोर कूड़ा योजना तो पूरा घपला है

Thu, 01 Sep 2016 01:53 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
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अधिकारी जाने कैसे डोर टू डोर कूड़ा योजना को क्लीन चिट दे रहे हैं ये तो फ्लाप है। ठेकेदारों ने अपने कितने कर्मचारी घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए लगाए हैं ये खुद नगर निगम को नहीं पता। जिस स्वास्थ्य विभाग पर पूरे शहर की सफाई की जिम्मेदारी है, उसको ही नहीं पता कि आउटसोर्सिंग से कितने कर्मचारी डोर टू डोर कूड़ा उठा रहे हैं। दो ठेकेदार अलग-अलग नामों से दो-दो एजेंसियां चला रहे हैं। उनको कितने रिक्शे मिले, वह रिक्शे किसके नाम से आवंटित हैं, इसका कोई हिसाब किताब नगर निगम के पास नहीं है। योजना के एक साल बाद अब ठेकेदारों से फार्म भरवाकर कर्मचारियों का ब्योरा पूछा जा रहा है।  
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घर-घर से कूड़ा उठाने वाली एजेंसियों आनंद नारायण कांट्रेक्टर्स, खान कांट्रेक्टर्स, एसएस कांट्रेक्टर्स, गीता जनकल्याण समिति, ऐनी जैनी कांट्रेक्टर्स, स्टार कांट्रेक्टर्स और रिट्स कांट्रेक्टर्स के किस वार्ड में कितने कर्मचारी कूड़ा उठा रहे हैं। इसका कोई भी रिकार्ड नगर निगम के पास नहीं है। इनमें ऐनी जैनी एसएस कांट्रेक्टर्स की और स्टार कांट्रेक्टर्स खान कांट्रेक्टर्स की एजेंसिया हैं। एक ही ठेकेदार की दो-दो एजेंसियां कूड़ा उठा रही हैं। ठेकेदार जितने कर्मचारी लिखकर देते हैं उसी हिसाब से उनका बिल स्वीकृत कर दिया जाता है। न तो कर्मचारियों की कोई मानीटरिंग है और न ही रिक्शों या कूड़ा उठाने की। ठेकेदारों से अनुबंध है कि 125 मकानों पर एक रिक्शा होना चाहिए। मगर, स्थिति ये है कि एक या दो रिक्शे पूरे-पूरे वार्डों को कवर कर रहे हैं। इसी वजह से गलियों में कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। ठेकेदारों को दो महीने पहले तक 740 रिक्शे मिले हैं। इससे पहले 450 रिक्शे ही थे। इनसे ही 55 वार्डों से कूड़ा उठाना दर्शाया जा रहा था। 
उधर, डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाले कर्मचारियों को 65 सौ रुपये प्रति माह दिए जाने के हिसाब से ठेकेदार नगर निगम से पेमेंट ले रहे हैं। हकीकत में रिक्शा कर्मचारियों को 35 सौ से चार हजार रुपये प्रति माह ही मिलते हैं। ठेकेदारों ने अपने कर्मचारियों से तीन से चार महीने का पेमेंट नहीं किया है। इससे कर्मचारियों का काम में मन नहीं लग रहा। बड़े पैमाने पर ठेकेदारों के सफाई कर्मी गायब रहते हैं। नगर निगम के पास रिकार्ड न होने से ठेकेदार अपनी मनमर्जी से कर्मचारी को जब चाहे नौकरी से निकाल देते हैं और नया कर्मचारी रख लेते हैं क्योंकि इनका ईपीएफ में पंजीयन नहीं है। 
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125 मकानों पर एक रिक्शा लगता है। बाकी ठेकेदारों का नहीं पता लेकिन हमने डोर टू डोर कर्मचारियों का ईपीएफ में पंजीयन कराया है। हमने पीलीभीत बाईपास रोड अपना दफ्तर खोला है। उसमें हेल्पलाइन भी है। अगर हमारा कर्मचारी कूड़ा उठाने न पहुंचे तो 0581-2520070 पर सुबह आठ से शाम पांच बजे तक फोन किया जा सकता है। हम अपने सुपरवाइजर से चेक कराएंगे। आतिफ खान, ठेकेदार डोर टू डोर 

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 ठेकेदार किसी कर्मचारी को रखे या किसी को निकाले। हमें इससे कोई मतलब नहीं। हमें तो इससे मतलब है कि डोर टू डोर कूड़ा उठे। इसमें सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। उत्तम कुमार, पर्यावरण अभियंता  

‘डोर टू डोर में किस ठेकेदार के कितने कर्मचारी कूड़ा उठा रहे हैं। इसका रिकार्ड अभी नहीं है। ठेकेदारों को फार्म देकर उनसे कर्मचारियों का ब्योरा मांगा गया है। हम भी ये रिकार्ड रखेंगे कि किस जोन में कितने डोर टू डोर कर्मचारी काम कर रहे हैं।’ डा. अशोक कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी 
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