नवाबगंज। ‘इतने भले मत बन जाना साथी, जितने भले हुआ करते हैं सरकस के हाथी।’ आमजन से सीधे सरोकार रखने वाली कविता की इन्हीं पंक्तियों के साथ प्रख्यात कवि और अमर उजाला के संपादक रहे वीरेन डंगवाल को मंगलवार को याद किया गया। केसरपुर गांव में स्थित उड़ान इंटरनेशनल स्कूल में उनकी स्मृति में आयोजित गोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों के विद्वतजनों ने उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
भगवान बुद्ध की प्रतिमा के अनावरण के बाद इस गोष्ठी का शुभारंभ स्व. वीरेन डंगवाल की पत्नी रीता डंगवाल और बेटे प्रफुल्ल डंगवाल ने परिजनों के साथ किया। गोष्ठी में बरेली कॉलेज के प्रो. श्यामलाल मौर्य ने कहा कि वीरेन डंगवाल मेरे साथ 15 साल तक रहे। इतिहास में हमेशा उनका नाम सम्मानपूर्वक लिया जाएगा। उन्होंने जो दिशा समाज को दिखाई है, उसका लोग अनुकरण करते रहेंगे। प्रो. आरके सिंह ने उन्हें प्रगतिशील विचारधारा का बताते हुए कहा कि, उन्होंने जो सम्मान दिया, उसको वह हमेशा याद रखेंगे। स्कूल के प्रबंध निदेशक डाॅ. रजनीश गंगवार ने कहा कि, उनकी ...सरकस के हाथी वाली प्रसिद्ध कविता आज भी मुझे याद है। इस तरह उन्होंने उनके बताए रास्तों पर सभी को चलने के लिए प्रेरित किया।
पैनी नजर सामाजिक संस्था की अध्यक्ष सुनीता गंगवार ने कहा कि उन्होंने हमेशा अन्याय के खिलाफ लड़ने पर जोर दिया। बरेली काॅलेज की बीए की छात्रा अपेक्षा ने वीरेन डंगवाल की कविता पढ़कर सुनाई। इस मौके पर प्रियंका, प्राची, विशाल गर्ग, डॉ. भरत गंगवार, स्वाति गंगवार, डाॅ. रितु गंगवार, अनीता मौर्य, सत्यवीर सिंह आदि लोग मौजूद रहे। संवाद