आईसीएसई और आईएससी में कुछ विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया तो कुछ को उम्मीद से कम अंक मिले। मनोवैज्ञानिकों और कॅरिअर काउंसलरों ने ऐसे छात्रों को निराश न होने और अंकों को स्वीकार कर भविष्य की तैयारी में जुटने की सलाह दी है।
मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र की प्रवक्ता यशिका वर्मा ने बताया कि छात्र अपनी रुचि के क्षेत्र से संबंधित अन्य कोर्सेज को देखें। यदि किसी छात्र की मेडिकल क्षेत्र में रुचि है, तो वह इससे संबंधित कोर्स में प्रवेश लेकर अपना कॅरिअर बना सकता है। इसी तरह अन्य छात्र भी अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विकल्प तलाश सकते हैं। मेडिकल क्षेत्र में एमबीबीएस के अलावा भी कई कोर्स उपलब्ध हैं, जैसे पैरामेडिकल, नर्सिंग या अन्य संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान।
उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग या कला के क्षेत्र में भी मुख्य डिग्री के अलावा कई विशेषज्ञता वाले कोर्स होते हैं। छात्रों को इन विकल्पों को गंभीरता से देखना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार उनमें प्रवेश की तैयारी करनी चाहिए। बरेली कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर सुविधा शर्मा ने भी छात्रों को कम अंकों को स्वीकार करने की बात कही। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के अंकों की तुलना उनके साथियों से न करें। इससे बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ता है।
कॅरिअर विकल्पों पर दें ध्यान
सुविधा शर्मा ने अभिभावकों को सलाह दी कि वे बच्चों के साथ बैठकर उनके भविष्य की योजना बनाएं। यदि उन्हें विकल्प समझ नहीं आ रहे हैं तो कॅरिअर काउंसलर की सहायता ली जा सकती है। अभिभावकों को बच्चों पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाना चाहिए। कॅरिअर चुनते समय बच्चों की रुचि को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्हें साथियों के दबाव में आकर कोई निर्णय लेने से भी बचाना चाहिए।