फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तो हो गया वीरपाल युग का अंत!

Mon, 02 Jan 2017 01:01 AM IST
बरेली
विज्ञापन
veerpal
विज्ञापन
लखनऊ में हुए सपा के अधिवेशन से उठी लहरों ने सुनामी बनकर बरेली में वीरपाल का किला ध्वस्त कर दिया। सीएम अखिलेश यादव के सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हीसभी जिला और महानगर ईकाइयां भंग हो गईं और इसके साथ ही बरेली में 20 साल से संगठन पर दबदबा कायम रखने वाले वीरपाल युग का अंत हो गया। अखिलेश वादियों में जश्न का माहौल है और प्रदेश सपा कार्यालय पर कब्जे के बाद बरेली में भी कभी भी उनका कब्जा सपा कार्यलय पर हो सकता है। यानी कुछ ही दिनों में बरेली में सपा नए कलेवर में दिखेगी।
विज्ञापन

बरेली में सपा के अधिकांश नेता लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में रविवार होने वाले पार्टी अधिवेशन पर नजरें लगाए थे। इसमें अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने शिवपाल सिंह को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने और नरेश उत्तम को प्रदेश अध्यक्ष बनने की घोषणा होते ही अखिलेश समर्थकों का उत्साह चरम पर दिखा। शाम तक पार्टी की जिला और महानगर इकाईयां भंग होने की खबर आ गई। इससे पार्टी के मौजूदा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव समेत उनके समर्थक तीन जिला उपाध्यक्ष अरविंद गंगवार, ब्रजेंद्र पटेल और शराफत यार खां, जिला महासचिव संजीव यादव, कोषाध्यक्ष बेचेलाल समेत सात महासचिव समेत 51 सदस्यीय कार्यकारिणी पैदल हो गई। इसी के साथ ही दो दशक से संगठन पर काबिज वीरपाल का दबदबा भी खत्म हो गया। बता दें कि वीरपाल सिंह यादव 1993 से लेकर अब तक सपा के जिलाध्यक्ष रहे हैं। बीच में केवल तीन साल के लिए तारा सिंह सोलंकी और भगवतसरन गंगवार को पार्टी का जिलाध्यक्ष जरूर बनाया गया। वह भी वीरपाल की सहमति से। मुलायम सरकार में वीरपाल का न केवल बरेली बल्कि पूरे मंडल में एकछत्र दबदबा था। हालांकि धर्मेंद्र यादव के बदायूं से सांसद बनने के बाद वीरपाल की मंडल में पार्टी पर पकड़ कमजोर हुई। अब अखिलेश यादव के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद बरेली से उनके दबदबे का अंत करीब लग रहा है। पुरानी जिला और महानगर कार्यकारिणी भंग होने के बाद अखिलेश समर्थक  सपा के नए जिलाध्यक्ष का नाम घोषित होने का इंतजार कर रहे हैं। 
मैं अब भी जिलाध्यक्ष हूं : वीरपाल
पूर्व राज्य सभा सदस्य और बिथरी से सपा प्रत्याशी वीरपाल सिंह यादव का कहना है कि जनेश्वर मिश्र पार्क में बुलाया गया पार्टी अधिवेशन असंवैधानिक है क्योंकि पार्टी संविधान के मुताबिक पार्टी का अविधेशन केवल राष्ट्रीय अध्यक्ष ही बुला सकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव हैं। अब ये मामला चुनाव आयोग जाएगा। तब फैसला होगा कि कौन सी समाजवादी पार्टी असली है और कौन सी नकली। फिलहाल, जब तक मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव नई कार्यकारिणी घोषित नहीं करते, तब तक वही जिलाध्यक्ष रहेंगे। कार्यकारिणी भी यथावत रहेंगे।   
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें