रोहतक में मामा ने बच्ची के साथ दुराचार किया
तलाक के मुद्दे पर शनिवार को मरकजी दारुल इफ्ता ने एक और फतवा जारी किया है। इसमें एक महिला ने फतवा मांगा है। जिस पर तलाक की सूरत बताते दारुल इफ्ता के आलिम ने कहा है कि तलाक खुदा को नापसंद है। लेकिन मर्द इसका अख्तियार जरूर रखता है कि उसके तलाक कह देने से तलाक हो जाएगा। फतवे में यह भी कहा कि मर्द को औरत के साथ नेक बर्ताव करना चाहिए।
इस फतवे में तिलियापुर सीबीगंज निवासी अर्शी खान ने चार सवाल दारुल इफ्ता में डाला था। इस पर कुरान व हदीस की रोशनी में जवाब मांगा। इसमें, मजहबे इस्लाम में शरीयत के एतबार से शौहर अपनी बीवी को किस तरह से निकाल सकता है? क्या मर्द के तलाक देने से बीवी निकाह से निकल जाती है या नही? तलाक देने की क्या सूरत है? क्या एक मजलिस में तीन तलाक देने से तलाक हो जाती है या नही?
इन सवालों पर जवाब देते हुए मुफ्ती मोहम्मद कौसर अली ने कहा है कि, बेवजह शरई तलाक देना अल्ला तआला को सख्त नापसंद है और मकरूह भी है। यह हदीस शरीफ है, मगर मर्द इसका अख्तियार जरूर रखता है वह अगर तलाक देगा तो तलाक हो जाएगी। उन्होंने एक हदीस पेश करते हुए यह भी कहा है कि अगर औरत को तलाक दे कर कभी फिर निकाह न चाहे तो खैर, वरना क्या मालूम कि दूसरी बीवी इससे भी बुरी मिले।
इसलिए मर्द को चाहिए कि जहां तक हो सके औरत के साथ नेक बर्ताव करे, उसकी दिलजोई और खुश करके अपनी इताअत (मर्जी) पर लाना चाहिए। उसकी बदअखलाकी पर सब्र करना चाहिए और अगर न समझे तो तलाक दे सकता है। मगर एक तलाक रजई से ज्यादा देना गुनाह है। सिर्फ एक बार उससे कहे मैंने तुझे तलाक दी। फिर अगर इद्दत के अंदर दिल में उसे रखने की आई तो जुबान से कह दे मैने तुझे अपने निकाह में वापस लिया। वह बदस्तूर उसके निकाह में रहेगी वरना उससे अलग रहे।