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जंगली कुत्तों ने एक और बच्चे को मार डाला

Sun, 25 Jan 2015 10:48 PM IST
बरेली
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66वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे इस देश में तंत्र के बीच जनता आज भी अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रही है। बहेड़ी तहसील उदाहरण है। यहां शीशगढ़ के टांडा रामनगर में शनिवार शाम जंगली कुत्तों के हमले में घायल हुए 12 वर्ष के शारिफ की देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई। पिछले 10 दिनों में जंगली कुत्तों के हमले में तीन मासूमों की मौत हो चुकी है और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार तंत्र यानी व्यवस्था अपनी जिम्मेदारी से बच रही है।
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गांव टांडा मीरनगर निवासी शफी का पुत्र शारिफ मानपुर के स्वामी सोमनाथ इंटर कालेज में कक्षा सात का छात्र था। शनिवार शाम पांच बजे वह अपने दोस्त सरताज के साथ सुल्तानपुर बस अड्डे के पास से खेलकर घर लौट रहा था। तभी नहर किनारे दस कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। सरताज तो जान बचाकर भाग निकला पर शारिफ गंभीर रूप से घायल हो गया। घरवाले उसे पहले बहेड़ी और फिर बरेली ले गए। देर रात निजी अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। घरवालों ने उसका पोस्टमार्टम नहीं कराया और शव ले गए। उसे गांव के कब्रिस्तान में उसे दफना दिया।
बताते चलें, 15 जनवरी को भट्ठे पर काम कर रहे पिता को खाना देकर लौट रही शीशगढ़ के रसूलपुर गांव की आठ साल की पिंकी को खूंखार जंगली कुत्तों ने मार डाला था। एसडीएम ने वन विभाग की टीम को कुत्ते पकड़ने के आदेश दिए थे। इसके बाद 18 जनवरी को शरीफनगर निवासी संजीव अग्रवाल की चार साल की बेटी वंशिका बच्चों के साथ गन्ने के खेत पर गई थी। कुत्तों ने उस पर हमला कर जान ले ली। बहेड़ी में यह घटना नई नहीं है। करीब दो साल पहले भी जंगली कुत्तों के हमले से सात लोगों की मौत हो चुकी थी। तब टीम बनाकर अभियान चलाया गया था। हालांकि सप्ताह भर बाद ही वह अभियान भी फुस्स हो गया था। इसके बाद भी प्रशासन और वन विभाग मामले को फुटबाल बनाकर एक दूसरे के पाले में डाल रहा है। एसडीएम जंगली कुत्ते तो वन विभाग आवारा कुत्तों के आदमखोर होने की घोषणा कर एक दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं। नगर पंचायत भी देहात का मामला बता कर अपना पल्ला झाड़ रहा है।
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वर्जन-----
जंगली कुत्तों को पकड़ने के लिए वन विभाग को पत्र लिखा था। उन्होंने अभी तक कुछ नहीं किया। डीएफओ को चिट्ठी भेजी है। अभियान चलाकर जंगली कुत्तों को पकड़ा जाएगा। नगर पंचायत को भी आदेश दिए गए हैं।
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रामेश्वर नाथ तिवारी एसडीएम
 
यह जंगली कुत्ते नहीं है। मृत पशुओं को खाकर आवारा कुत्ते आदमखोर हो गए हैं। टीम ने शरीफनगर जाकर जांच की थी। यह हमारे अधिकार क्षेत्र का मामला नहीं है।
गोविंद राम गंगवार, डिप्टी रेंजर
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