करीब पखवाड़े भर में आवारा कुत्तों ने शनिवार को चौथे मासूम को शिकार बना डाला। यह घटना फरीदपुर टाउन ऐरिया इलाके में हुई। यहां लखनपुर के ईंट भट्ठे पर काम करने वाले अनीस अहमद के 14 साल के बेटे मुजम्मिल को आठ आवारा कुत्तों ने पटक-पटक कर बुरी तरह नोच कर मौत की नींद सुला दिया। इसके ठीक चार घंटे बाद जनूबी गांव के हरीश नाम के मासूम को कुत्तों ने नोचकर घायल कर दिया। आदलपुर गांव में भी कुत्तों के हमले में 10 साल का योगेश जख्मी हुआ है। कुत्तों के हमले में एक के बाद एक मौतों के बाद भी जिम्मेदार विभाग नगर निकाय और जंगलात जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर असंवेदनशीलता का परिचय दे रहे हैं।
घटना शनिवार सुबह करीब दस बजे की है। अनीस अहमद अपने बड़े बेटे मुजम्मिल और अन्य परिवारीजनों के साथ लखनपुर गांव के ईंट भट्ठे पर पथाई कर रहे थे। इस बीच मुजम्मिल अब्बू से कहकर करीब सौ मीटर दूरी पर बरसीम के खेत में शौच के लिए चला गया। वहां आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला बोल दिया। उसे खेत में पटक- पटक कर बुरी तरह से नाेंच डाला। इससे उसके शरीर में कई जख्म हो गए। उसकी चीख सुनकर अनीस खेत पर पहुंचे तो वहां कुत्ते उनके पुत्र को बुरी तरह नोंच रहे थे। कुत्तों ने अनीस पर भी हमला बोल दिया। खेत में रखे फावड़े से उसने जैसे-तैसे अपने को बचाया। इस बीच भट्ठे से मजदूर दौड़ कर वहां पहुंचे तो कुत्ते जंगल की ओर भाग निकले। मुजम्मिल को सीएचसी लाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
करीब चार घंटे बाद जनूबी गांव के बारह वर्षीय हरीश कुमार पर कुत्तों ने उस वक्त हमला बोल दिया जब वह खेत पर बरसीम काटने के लिए गया हुआ था। उसकी पीठ पर कई जगह कुत्तों ने नाेंच लिया। खेतों पर मौजूद लोगों ने कुत्तों को खदेड़ कर हरीश को बचाया। देर शाम आदलपुर गांव के ओमकार के 10 वर्षीय पुत्र योगेश पर भी खेत में आवारा कुत्तों ने हमला बोला। उसकी मां की चीख सुनकर एक कार सवार ने बच्चे को बमुश्किल बचाया। आवारा कुत्तों का शिकार हुए मुजम्मिल के घर पहुंचे नवाब राशिद खां ने प्रशासन से मांग की है कि उसके परिजनों को सरकार की ओर से आर्थिक मदद दिलाई जाए।
इंसेट-
सात बच्चों में सबसे बड़ा था मुजम्मिल
बहेड़ी। अनीस अहमद के दो पुत्र व पांच पुत्रियां हैं। मुजम्मिल उसके सात बच्चों में सबसे बड़ा था। अपने माता-पिता के साथ भट्ठे पर हाथ बंटाता था। उसकी मौत से पूरा परिवार सदमे में है। मां शहवाज बेगम तो अपने लाल की लाश को घर के आंगन में रखा देखकर गश खाकर गिर पड़ी । वह बार-बार अपने लाल के शव से लिपट कर रोती रही। उसके ताऊ जो उसे रोजाना एक टॉफी दिया करते थे, की आंखों के आंसू भी थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
इंसेट-
वन विभाग व प्रशासन ने पल्ला झाड़ा
इससे पहले तहसील क्षेत्र के तीन और बच्चों की आवारा कुत्तों के नाेंचने से मौत हो चुकी है। डीएम के हड़काने के बाद वन विभाग व एसडीएम ने इनके खिलाफ अभियान चलाकर मारने की बात की थी। वन विभाग ने महज पांच दिन गांवों में जाकर ग्रामीणाें को इन आवारा कुत्ताें को मार देने को लेकर जागरूक तो किया लेकिन इस तरह के एक भी कुत्ते को नहीं मारा। एसडीएम व वन विभाग के रेंजर अपना-अपना पल्ला झाड़कर शांत होकर बैठ गए। वन विभाग के अफसरान कहते हैं कि यह जगंली कुत्ते नहीं हैं। आवारा कुत्ते पकड़ने का काम हमारा नहीं है। एसडीएम कहते हैं कि आवारा कुत्तों को ग्रामीणों को मार देना चाहिए लेकिन इसका उपाय दोनों में से किसी के पास नहीं है।
अपने-अपने तर्क-----------
वर्जन-
जंगली कुत्ते पूरे प्रदेश में नहीं हैं। यह आवारा कुत्ते हैं। इनके खिलाफ वन विभाग अभियान नहीं चला पाएगा। प्रशासन नगर पालिका नगर पंचायत से इनको पकड़ने का काम कराए। -आरपी सिंह, रेंजर
वर्जन-
आवारा कुत्ताें के हमले से मासूम की मौत की जानकारी मिली है। ग्रामीण जनहानि करने वाले इन कुत्तों को जहां देखें बेखौफ होकर मार दें। इस मामले में डीएम से वार्ता कर वन विभाग के डीएफओ के जरिये इनके खिलाफ अभियान चलाने की सिफारिश करूंगा। ग्रामीण इस तरह के कुत्ते जहां भी देखें, उसकी जानकारी हलका लेखपाल व उन्हें सीधे दें। वन विभाग की टीम इन कुत्तों को मारेगी। -आर एन तिवारी, एसडीएम बहेड़ी
वर्जन-
शहर में इस तरह की वारदात नहीं हुई है। यह सारे मामले देहात के हैं, लिहाजा नगर पालिका इसमें कुछ नहीं कर सकती है।-आरआर अंब्रेश, ईओ नगर पालिका बहेड़ी
वर्जन-
ग्रामीण अंचल में कुत्तों के खिलाफ अभियान नहीं चला सकते हैं। इसमें वन विभाग को कुछ करना चाहिए।-वीरेन्द्र जायसवाल, ईओ नगर पंचायत शेरगढ़
इंसेट
मासूम बनते रहे हैं शिकार
बताते चलें, 15 जनवरी को भट्ठे पर काम कर रहे पिता को खाना देकर लौट रही शीशगढ़ के रसूलपुर गांव की आठ साल की पिंकी को खूंखार जंगली कुत्तों ने मार डाला था। इसके बाद 18 जनवरी को शरीफनगर निवासी संजीव अग्रवाल की चार साल की बेटी वंशिका बच्चों के साथ गन्ने के खेत पर गई थी। कुत्तों ने उस पर हमला कर जान ले ली। 24 जनवरी की शाम शीशगढ़ के टांडा रामनगर में जंगली कुत्तों ने हमला कर 12 वर्ष के शारिफ को घायल कर दिया था जिसकी देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
करीब दो साल पहले भी जंगली कुत्तों के हमले से सात लोगों की मौत हुई थी। तब टीम बनाकर अभियान चलाया गया था।
अकेले जाने में लगने लगा है डर
बहेड़ी। शहर व देहात क्षेत्र के लोग कुत्तों के मासूमों पर हमले से बेहद डरे व सहमे हुए हैं। लोग देर शाम के बाद अपने बच्चों को बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। कई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से भी डर रहे हैं। बच्चों के स्कूल जाने से लेकर आने तक बच्चों की सुरक्षा की चिंता उन्हें सताती रहती है।
ग्राम गुलड़िया भवानी के चौधरी वीरेंद्र सिंह, रिछौला फार्म निवासी सरदार लखविंदर सिंह एडवोकेट, मनुआपट्टी के किसान हरदेव सिंह, शाहगढ़ के हाजी मंसूब अली खां, भैसिया गांव के निवासी अफसर अली कहते हैं कि खेतों में काम करने और बच्चों को अकेले भेजने में डर लगने लगा है। प्रशासन और वन विभाग को कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने के लिए जल्द से कुछ करना चाहिए।