छात्र संघ चुनाव कराने से बरेली कॉलेज ने तो साफ इंकार करके अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी थी, लेकिन रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन इसकी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। हाल यह है कि न भी नहीं करेंगे और चुनाव कराएंगे भी नहीं। इस तरह से संशय की स्थिति खुद विश्वविद्यालय प्रशासन बनाए हुए है। मकसद साफ है कि छात्र नेता वक्त बीतने के साथ खुद ही शांत बैठ जाएं।
कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन जानते हैं कि छात्र संघ चुनाव कराने का नियम है और इसके लिए शासनादेश जारी भी हो चुका है, इसलिए इंकार नहीं किया जा सकता। वह लगातार कहते आ रहे हैं कि चुनाव कराने से हम इंकार नहीं कर रहे, लेकिन कब कराएंगे? सवाल को वह कभी छात्र संघ चुनाव अधिकारी बनने के लिए किसी के तैयार न होने और कभी जिला प्रशासन से चुनाव के लिए सहयोग न मिलने का तर्क देने लगते हैं। इसको छात्र नेता बहानेबाजी मानते हैं। समाजवादी छात्र सभा के नेता गजेंद्र पटेल कहते हैं कि टालमटोल की भी हद होती है। कुलपति चाहें तो किसी भी प्रोफेसर को चुनाव अधिकारी की जिम्मेदारी दे दें तो वह इंकार नहीं कर सकेगा, लेकिन वह चुनाव कराना ही नहीं चाहते। गजेंद्र का कहना है कि हम चुनाव के लिए आंदोलन की हद तक नहीं जाना चाहते।
छात्र नेताओं ने कई बार चुनाव के लिए कुलपति, प्रतिकुलपति और कुलसचिव का घेराव किया। विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन पर प्रदर्शन भी किया, लेकिन हर बार उनको यही आश्वासन दे दिया गया कि चुनाव अधिकारी बनने के लिए कई प्रोफेसर से बात हो रही है। सप्ताह भर का समय दे दीजिए। इसके बाद कह दिया गया कि कोई चुनाव अधिकारी बनने को तैयार नहीं है। अब पहले चुनाव करा चुके प्रोफेसर को पत्र लिखेंगे, लेकिन उसके बाद भी कुछ नहीं हुआ। जाहिर है कि अब तो लिंग्दोह आयोग की सिफारिशों के मुताबिक चुनाव के लिए तय समय सीमा भी बीच चुकी है। हालांकि चार साल पहले 2012 का चुनाव भी नवंबर में ही कराया गया था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के रुख से स्थिति साफ है और इसको सब समझ रहे हैं। उनकी हां में भी न ही है।
हम तो चुनाव कराने को तैयार हैं, लेकिन कोई चुनाव अधिकारी ही बनने को तैयार नहीं। कोशिश जारी है। इससे ज्यादा इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा।
-प्रो. मुशाहिद हुसैन, कुलपति