अगर आप एलर्जी या दमा के मरीज हैं तो दिवाली पर सतर्क रहने की जरूरत है। पटाखों से निकलने वाली खतरनाक गैसें और हैवी मेटल्स आपको भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए आतिशबाजी के दौरान बाहर निकलने से बचें। दिवाली के अगले दिन मॉर्निंग वॉक ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। मौसम में नमी के कारण पटाखों से निकलने वाली कार्बन डाई-ऑक्साइड, कार्बन मोनोक्साइड, सल्फर डाई-ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें ओस और कोहरे से मिलकर वायुमंडल के निचले स्तर पर होंगी। हवा में घुले हैवी मेटल सांस के साथ आपके शरीर में पहुंचकर फेफड़े और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर बाहर निकलें तो मुंह पर मास्क लगा लें। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. अजय मोहन अग्रवाल और डॉ. रविंद्र पोरवाल बताते हैं कि एलर्जी, दमा और ह्रदय रोगियों के लिए दिवाली के अगले दिन मॉर्निंग वॉक खतरनाक हो सकती है। पटाखों से टोटल सस्पेंडेड पार्टीकुलेट मेटर जो हैवी मेटल होते हैं, सांस के माध्यम से ये शरीर में पहुंचकर कैंसर का कारण भी बन सकते हैं।
पटाखों से निकलने वाली गैस और नुकसान
कार्बन डाई ऑक्साइड : शरीर की ऑक्सीजन को प्रभावित करता है। धीरे-धीरे सुस्ती आने लगती है, इंसान बेहोश तक हो सकता है।
कार्बन मोनोक्साइड : सबसे खतरनाक गैस जो फेफड़े पर असर करती है और दिल में खून के बहाव तक को प्रभावित कर सकती है।
सल्फर डाई ऑक्साइड : आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है।
यह हैवी मेटल निकलते हैं
कॉपर, स्ट्रोनसियम,बेरियम जैसे खतरनाक हैवी मेटल लंबे समय तक वातावरण में रहते हैं। शरीर में पहुंचकर नष्ट नहीं होते। कैंसर का कारण बन सकते हैं।
जल जाएं तो तुरंत ठंडा पानी डालें
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. अजय मोहन अग्रवाल और डॉ. रविंद्र पोरवाल ने बताया कि दमा और एजर्ली के मरीजों को पटाखों से निकलने वाली गैस सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए शाम को ऐसे लोग बाहर न निकलें। हो सके तो मास्क पहनें। सुबह मॉर्निंग वॉक पर न जाएं। अगर पटाखे जलाते वक्त हाथ जल जाए तो तुरंत ठंडा पानी डाले। अगर आंख में बारूद पहुंच गया है तो तुरंत साफ करें और चिकित्सक को दिखाएं। पटाखे जलाते वक्त एक बाल्टी पानी जरूर अपने पास रखें।