लॉकडाउन में तमाम फरियादें अनसुनी हैं। अंदरूनी इलाकों में रहने वाली हजारों लोगों की आबादी के लिए भूख जिंदगी और मौत का सवाल बन गई है। राशनकार्ड न होने की वजह से न सरकारी राशन उन्हें मिल पा रहा है न संकरी गलियों में उनके दरवाजों तक न समाजसेवियों की मदद पहुंच रही है। तमाम ऐसे परिवारों की जिंदगी पड़ोसियों के रहमोकरम पर निर्भर रह गई है तो कई को एक टाइम की रोटी भी मुश्किल से मिल पा रही है।
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और फिर अगले दिन 21 दिनों का पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा होते ही इन परिवारों की जिंदगी तमाम दायरों में कैद हो गई। रोज मेहनत कर परिवारों के लिए रोटी का बंदोबस्त करने वाले दिहाड़ी मजदूरों और ठेले-फड़ लगाने वालों के लिए दोनों टाइम के खाने का इंतजाम करना मुश्किल हो गया।
राशन की कालाबाजारी की तो खैर नहीं
आंवला सांसद धर्मेंन्द्र कश्यप ने राशन कोटेदारों को इस संकट में राशन की कालाबाजारी न करने की चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि समर्थकों से उन्हें शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ कोटेदार राशन बांटने में गड़बड़ियां कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राशन वितरण में गड़बड़ी किए जाने पर कोई भी उन्हें या उनके मीडिया प्रभारी राहुल कश्यप को फोन पर सूचना दे सकता है, वे कोटेदार के खिलाफ तुरंत कार्रवाई कराएंगे।