दवाओं और सर्जिकल खरीदारी में कमीशनखोरी को खत्म करने के लिए जिस यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन (यूपीएमएसएसी) का गठन किया गया। वह अब दवा कंपनियों की जेब भरने का काम करने लगी है। जनता के स्वास्थ्य का ध्यान नहीं है, बस अधोमानक दवाइयों को खपाने भर का यूपीएमएसएसी अड्डा बनकर रहा गया है। यही एक बड़ी वजह है कि इसके जरिए सप्लाई होने वाली दवाइयों में खांसी, बुखार, जुकाम, एंटीबायोटिक और मलेरिया समेत बीते 12 माह में दस से अधिक दवाओं, सिरप और इंजेक्शन के सैंपल फेल हो चुके हैं।
जब कोई दवा मरीज के लिए कंपनियां सप्लाई करती हैं तो यह देखने के लिए कि वह दवा मरीज को देने लायक (मानक के अनुसार) है या नहीं या फि र दवा मरीज पर उल्टा असर तो नहीं करेगी, इसके लिए दवा के सैम्पल का लैब में टेस्ट कराया जाता है। मानक के अनुसार पाए जाने पर ही इसे मरीजों को दिया जाता है।
सूचना के अनुसार 17,50,000 सिरप पर रू. 8.90 की दर से लगभग एक करोड़ पचपन लाख पचहत्तर हजार रूपये की अधोमानक (एंटीबायटिक एजिथ्रोमाइसिन सिरप) की खरीद हुई जिसमें से अधिकांश की खपत हो गई, इसलिए इनकी वसूली भी नहीं होगी और सरकार के राजस्व को लगेगा चूना।
स्वास्थ्य विभाग के जानकार के मुताबिक नियमानुसार कॉरपोरेशन फार्मा कंपनियों को दवा आपूर्ति का आर्डर देता है। मगर आपूर्ति से पहले निजी एजेंसी से दवा की गुणवत्ता की जांच कराई जाती है। इसके बाद यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन का क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर सरकारी एजेंसी से जांच कराता है। इसके बाद ही दवाएं अस्पताल तक पहुंचती हैं। यहां सवाल उठ रहा है कि अगर कॉरपोरेशन दो स्तर पर जांच कराता है तो फिर खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में इस दवा के सैंपल क्यों फे ल हो रहे हैं।
अब तक ओंडनसेट्रान सिरप, डेक्सामिथासोन, इंजेक्शन आर्टिसुनेट, आयरन फ्लोरिक एसिड, इंजेक्शन एल्टीक्यूहेट, लिग्नोकेन विथ एडिनोलिन, एमाक्साकिल्न एंड पोटेशियम क्लाउलेनेट समेत अन्य दवाओं, सिरप और इंजेक्शन के सैंपल फेल हो चुके हैं।