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यूपी: सरकारी दवाओं पर न करें एतबार..यह आपको ठीक नहीं कर रहींं

Sat, 01 Feb 2020 12:33 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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दवाओं और सर्जिकल खरीदारी में कमीशनखोरी को खत्म करने के लिए जिस यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन (यूपीएमएसएसी) का गठन किया गया। वह अब दवा कंपनियों की जेब भरने का काम करने लगी है। जनता के स्वास्थ्य का ध्यान नहीं है, बस अधोमानक दवाइयों को खपाने भर का यूपीएमएसएसी अड्डा बनकर रहा गया है। यही एक बड़ी वजह है कि इसके जरिए सप्लाई होने वाली दवाइयों में खांसी, बुखार, जुकाम, एंटीबायोटिक और मलेरिया समेत बीते 12 माह में दस से अधिक दवाओं, सिरप और इंजेक्शन के सैंपल फेल हो चुके हैं।

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जिलों में दवाआें की सप्लाई हो जाती है और उनका वितरण भी हो जाता है। मरीज अस्पताल आकर इस भरोसे से दवा लेकर जाता है कि यह उसे फायदा करेगी लेकिन वह ठीक होने की बजाए और बीमार होता है। कारण है कि ले जाई गई दवा अधोमानक होती है और वह उसे फायदा नहीं करती है। इससे उसकी हालत और बिगड़ती चली जाती है। ऐसे में यह दवा लोगों के पेट में पहुंच चुकी होती है और पैसा दवा कंपनियों की जेब में चला जाता है।

यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से सितंबर और अक्तूबर माह में 30 हजार एजिथ्रोमाइसिन सिरप की सप्लाई भेजी थी। इसके बाद सीएचसी-पीएचसी पर बीस हजार सिरप की सप्लाई भेज दी गई जहां इनका वितरण भी हो चुका है। 30 जनवरी को एंटीबायटिक एजिथ्रोमाइसिन सिरप का सैंपल फेल हो गया। लेकिन तब तक 20 हजार बच्चे इसे पी चुके थे। इसके बाद कॉरपोरेशन से इसकी रिपोर्ट आई कि सैंपल फेल हो गया है। यह दवा छोटे बच्चों को सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल फीवर में दी जाती है। अब शासन ने 31 जनवरी को इसके प्रयोग पर रोक लगा दी है। सप्लाई करने वाली कंपनी पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इस सिरप को मेसर्स टेरेस फार्मास्युटिकल प्रा.लि. सप्लाई कर रही है।

अधोमानक दवा किसे कहते हैं

जब कोई दवा मरीज के लिए कंपनियां सप्लाई करती हैं तो यह देखने के लिए कि वह दवा मरीज को देने लायक (मानक के अनुसार) है या नहीं या फि र दवा मरीज पर उल्टा असर तो नहीं करेगी, इसके लिए दवा के सैम्पल का लैब में टेस्ट कराया जाता है। मानक के अनुसार पाए जाने पर ही इसे मरीजों को दिया जाता है।

सरकार को लगा करोड़ों का चूना

सूचना के अनुसार 17,50,000 सिरप पर रू. 8.90 की दर से लगभग एक करोड़ पचपन लाख पचहत्तर हजार रूपये की अधोमानक (एंटीबायटिक एजिथ्रोमाइसिन सिरप) की खरीद हुई जिसमें से अधिकांश की खपत हो गई, इसलिए इनकी वसूली भी नहीं होगी और सरकार के राजस्व को लगेगा चूना।

दवाओं के सैंपल हो रहे फेल.. कॉरपोरेशन की जांच प्रक्रिया पर सवाल

स्वास्थ्य विभाग के जानकार के मुताबिक नियमानुसार कॉरपोरेशन फार्मा कंपनियों को दवा आपूर्ति का आर्डर देता है। मगर आपूर्ति से पहले निजी एजेंसी से दवा की गुणवत्ता की जांच कराई जाती है। इसके बाद यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन का क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर सरकारी एजेंसी से जांच कराता है। इसके बाद ही दवाएं अस्पताल तक पहुंचती हैं। यहां सवाल उठ रहा है कि अगर कॉरपोरेशन दो स्तर पर जांच कराता है तो फिर खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में इस दवा के सैंपल क्यों फे ल हो रहे हैं।

अब तक इन दवाओं के सैंपल हुए फेल

अब तक ओंडनसेट्रान सिरप, डेक्सामिथासोन, इंजेक्शन आर्टिसुनेट, आयरन फ्लोरिक एसिड, इंजेक्शन एल्टीक्यूहेट, लिग्नोकेन विथ एडिनोलिन, एमाक्साकिल्न एंड पोटेशियम क्लाउलेनेट समेत अन्य दवाओं, सिरप और इंजेक्शन के सैंपल फेल हो चुके हैं।

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