अगर सड़क किनारे लगे कैनोपी से आप यह सोचकर एलईडी बल्ब खरीद रहे हैं कि यह सरकारी योजना का बल्ब है तो सावधान हो जाएं। यह बल्ब बिजली विभाग नहीं बेच रहा है। प्रदेश में उजाला योजना 20 जून को ही बंद की जा चुकी है लेकिन धंधेबाजों ने उसी की आड़ में अबतक कैनोपी लगाकर अस्सी से लेकर 99 रुपये तक बल्ब बेच रहे हैं। इसपर गारंटी भी दिखाई जा रही है लेकिन यह सिर्फ काला धंधा है। हैरत यह है कि यह खेल बिजली दफ्तरों के इर्द-गिर्द ही हो रहा है लेकिन इसपर किसी ने ध्यान तक नहीं दिया।
पिछले वर्ष केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने बिजली बचत कार्यक्रम शुरू किया था, इसके तहत बरेली समेत सभी प्रमुख शहरों में सात वाट क्षमता वाले एलईडी बल्ब उपलब्ध कराए गए। उजाला कार्यक्रम नाम से सौ रुपये वाला बल्ब टैक्स कम होने पर अस्सी रुपये में मिलने लगा था। सरकारी एजेंसी ने यूपी में बिक्री लक्ष्य 103 लाख पूरा होने पर दो माह पहले 20 जून से योजना बंद कर दी। इसके बावजूद बरेली और आसपास शहरों में जगह जगह काउंटर लगाकर सरकारी योजना नाम से बल्ब अवैध रूप से बेंचे जा रहे हैं। ग्राहकों से अधिक वसूली भी हो रही है।
बिजली कार्यालयों पर काउंटर
बिजली उपकेंद्र, कार्यालय और आसपास इलाकों में सरकारी योजना नाम से बल्ब बेचे जा रहे हैं। चौपुला, किला उपकेंद्र, एसई शहर और सर्किट हाउस मार्ग पर अधिशासी अभियंता ग्रामीण कार्यालय समेत दर्जन भर स्थानों पर काउंटर संचालित हैं। इन अवैध काउंटरों पर उजाला योजना के बैनर भी लगे हैं।
अवैध बल्ब
उजाला योजना में सिर्फ सात वाट की एलईडी उपलब्ध करायी थीं, लेकिन अब अवैध रुप से पांच, सात और नौ वाट की एलईडी बल्ब दिए जा रहे हैं। इसमें निजी कंपनियाें के बल्ब शामिल हैं। यह उन्हीं कंपनियों के हैं यह भी नहीं कहा जा सकता।
अफसर अनभिज्ञ
एसई शहर मनोज पाठक ने बताया कि एलईडी काउंटर कौन लगवा रहा है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। कार्यालय परिसर में लगे काउंटर संचालक से जानकारी ली तो पता चला कि अस्सी वाला बल्ब 85 रुपये में बिक रहा था।
योजना बंद
उजाला परियोजना अभियंता विजय कुमार ने बताया कि 20 जून से यूपी में योजना बंद कर दी है। क्योंकि सरकार ने 103 लाख बल्ब बिक्री लक्ष्य पूरा हो चुका है। कुमार ने बताया कि काउंटरों से हो रही एलईडी बिक्री पूरी तरह अवैध है, इससे टैक्स चोरी हो रही है, विभाग इस पर अंकुश लगाए।