कमिश्नर डॉ. पीवी जगनमोहन ने राज्य सरकार के फीस निर्धारण अध्यादेश को सख्ती से लागू कराने के लिए जिलास्तरीय कमेटी बना दी है। इसके साथ ही कमिश्नर ने पैरेंट्स और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से वादा किया है कि अब अगर वह किसी स्कूल के मनमानी फीस वसूलने, यूनिफार्म, किताबें खास दुकानों से खरीदने की शिकायत डीएम अंकल से करेंगे तो वह जरूर सुनेंगे और उस पर कार्रवाई भी करेंगे।
मंडलायुक्त डॉ. पीवी जगनमोहन ने ‘स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क निर्धारण अध्यादेश 2018’ सख्ती से लागू कराने के लिए बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर के डीएम की अध्यक्षता में तीन-तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है। जिलाधिकारी कमेटी के अध्यक्ष और डीआईओएस कमेटी के सचिव होंगे। तीसरे सदस्य के रूप में बीएसए को रखा गया है। यह जिला स्तरीय कमेटी प्राइवेट स्कूलों द्वारा अभिभावकों से वसूले जाने वाली फीस, यूनिफार्म और किताबों की शिकायतों की जांच करेगी। मंडलायुक्त ने कहा कि जिलाधिकारी अपनी अध्यक्षता में बनी कमेटी के माध्यम से जनसाधारण के बीच अध्यादेश का प्रचार-प्रसार कराएं और प्राइवेट स्कूलों से उसका सख्ती से पालन कराएं। अगर कोई विद्यालय अध्यादेश का पालन करने से मना करता है तो इसमें निर्धारित प्रावधानों से कार्रवाई कराने की जिम्मेदारी डीएम की होगी। डीएम संबंधित विद्यालय के विरुद्ध मंडलीय कमेटी को लिखेंगे। कमिश्नर ने कहा कि राज्य सरकार का अध्यादेश परिषदीय प्राइमरी या जूनियर विद्यालयों को छोड़कर समस्त बोर्डों से मान्यता प्राप्त स्ववित्त पोषित विद्यालयों पर लागू होगा।
पैरेंट्स अब शिकायत करें, होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मंडलायुक्त द्वारा जिला प्रशासन की कमेटी गठित करने का आदेश उनको मिल गया है। जिन पैरेंट्स ने पहले उनको शिकायतें की हैं, वह या उनके अलावा दूसरे पैरेंट्स किसी भी प्राइवेट स्कूल की फीस अधिक वसूलने, यूनिफार्म, किताबें खास दुकान से खरीदने समेत किसी भी मनमानी की शिकायत करें तो जिला कमेटी उसकी जांच कराएगी। दोषी पाए जाने पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति मंडलीय कमेटी को की जाएगी। कोई भी पैरेंट्स कार्यालय समय में आकर लिखित शिकायत दर्ज करा सकता है। पहले जिन पैरेंट्स ने शिकायतें की हैँ, उनको भी अध्यादेश लागू होने के बाद दोबारा शिकायतें दर्ज करानी होंगी। कोई भी विद्यालय अध्यादेश से ज्यादा निर्धारित फीस नहीं वसूल सकता।
पेरेंट्स को फौरी राहत नहीं: औपचारिकता ही न रह जाएं ये कमेटियां
बरेली। जिले भर के पेरेंट्स को फौरी राहत नहीं मिलने वाली। फीस नियंत्रण के लिए सरकार अध्यादेश लाई तो हर कोई सीएम के कदम को निजी स्कूलों की मनमानी पर वार मान रहा था। अपनी महीने भर की कमाई एक बच्चे के दाखिले और किताबें खरीदने पर न्योछावर होने से बेहाल अभिभावक को आस बंधी थी। दस तारीख को अधिसूचना जारी होने के बाद से पैरेंट्स हेल्पलाइन पर फोन करके लगातार एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि क्या उनके बच्चे की बीस हजार से अधिक सालाना स्कूल फीस में संशोधन होगा, वे टर्म फीस जमा कराए या रुकें? जवाब के नाम पर प्रशासन ने फिलहाल मंडल और जिला स्तर पर कमेटी गठित करने की घोषणा है। यह कमेटी कब बनकर शहर के स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने की स्थिति में आ पाएगी, प्रशासन ने इस पर कोई टाइम लिमिट तय नहीं की है। हालांकि यह अध्यादेश सेशन 2018-19 के लिए प्रदेश भर में तत्काल लागू हो चुका है। इस मामले में अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अंकुर किशोर सक्सेना कहते हैं कि समिति किस फार्मूले के हिसाब से स्कूलों से अभिभावकों को वह रुपया लौटाएगी जो वह जमा कर चुके हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं है, समिति को सुनिश्चित करना होगा कि वह ऐसी प्रक्रिया अपनाए जो निष्पक्ष और जल्द लाभ पहुंचने वाली हो।
कार्रवाई से डरे स्कूलों ने वापस ले ली फीस बुक
पुष्ट सूत्रों से पता लगा है कि शहर के तीन सबसे पुराने और बड़े पब्लिक स्कूलों ने पिछले सप्ताह अपनी फीस स्टूडेंट के जरिए वापस मांग ली। असल में नियम के मुताबिक, किसी कक्षा में बीस हजार से अधिक सालाना फीस होने पर वह जांच के दायरे में आ जाएगा। शहर के बड़े से छोटे स्कूलों तक में सालाना फीस राशि निर्धारित से दोगुनी और दोगुनी से अधिक तक है। शहर के प्रमुख बुकसेलर के संचालित पब्लिक स्कूल में भी फीस बुक वापस ली गई है। जिसे बुकसेलर पर लगातार प्रशासन की ओर से की जा रही छापामार कार्रवाई का नतीजा भी कहा जा सकता है।