सेटेलाइट बस स्टैंड पर अब अतिक्रमण का हाल देख कर डीएम ने चौकी इंचार्ज को चेतावनी दे दी है कि यहां (सेटेलाइट) से ठेले हटेंगे या फिर तुम हटोगे। बस स्टैंड के दोनों साइडों पर फल, चाट आदि के ठेला और खोमचे वालों ने अतिक्रमण कर रखा है। रोडवेज ने कई बार इन्हें हटाने का प्रयास किया, मगर सफलता नहीं मिली। अतिक्रमण की वजह से बसों के स्टैंड में आने जाने में भारी दिक्कत होती है और हर वक्त जाम लगा रहता है।
डीएम सुरेंद्र सिंह सोमवार शाम सेटेलाइट बस स्टैंड के आस पास अतिक्रमण का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने रोडवेज के आरएम प्रभाकर मिश्रा से पूरी स्थिति की जानकारी ली और यातायात व्यवस्था को भी समझा। इस दौरान साथ में एसपी ट्रैफिक ओपी यादव भी थे। उन्होंने एक मैप दिखाया,जिसमें बस स्टैंड के कोने को साफ रखने और सामने लगने वाले ठेला फड़ वालों को आगे बढ़ाने का प्लान भी है। साथ ही नकटिया की ओर जाने वाले आटो के स्टेंड को भी आगे बढ़वाने की बात कही।
पीने का पानी भी देखा
डीएम ने अपने निरीक्षण के दौरान सेटेलाइट बस स्टेशन का भी निरीक्षण किया। यहां सबसे पहले उनकी निगाह पीने के पानी की टैप पर पड़ी। पास जा कर देखा और रोडवेज अधिकारियों से पूछा कि कौन का पानी यात्रियों को पिला रहे हो, आरओ है या नहीं। हां का जवाब मिलने पर डीएम ने कहा आरओ ही पिलाओ। यहीं पर घूमे तो ऊपर लगे टीवी पर उनकी निगाह पड़ी। रोडवेज अधिकारियों से कहा भई टीवी आपका धुंधला चल रहा है इसे ठीक कराइए। सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए मशीन के इस्तेमाल की बात कही। इस मौके पर आरएम प्रभाकर मिश्रा, एसएम मृगांक अग्रवाल, एआरएम (रुहेलखंड) जेडए नोमानी, एआरएम (बरेली) एसके वर्मा, एसएस कपिल वार्ष्णेय, सहायक अभियंता (रोडवेज) के अलावा नगर निगम, बीडीए, पीडब्लूडी विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।
डीएम ने बनाया खाका
डीएम ने यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने की रणनीति बनाते हुए कहा है कि पैसे की कमी आड़े नहीं आएगी। चौराहा सुंदर बनना चाहिए।
ये है रणनीति-
-चौराहा चौड़ा, आस पास के होंर्डिंग व बिजली के पोल पीछे हटेंगे, बिजली के तार अंडरग्राउंड कराए जाएंगे।
-लखनऊ से दिल्ली बदायूं, पीलीभीत से लखनऊ की ओर और शहर की ओर से पीलीभीत बाई पास जाने वाले ट्रैफिक को सिगनल पर नहीं रुकना पड़ेगा।
- कम ट्रैफिक वाली तीन सड़कों के लिए तीनों तरफ अलग लेन बनेगी।
- चौराहे पर ज्यादा ट्रैफिक वाले रोड के लिए सिग्नल टाइमिंग में होगा अंतर।
ये तो पुलिस की कमाई का चौराहा है
बरेली। रोडवेज के अफसर ने सेटेलाइट बस अड्डे के अंदर ठेला लगाने पर दुकानदार को बहार निकाल दिया था। पुलिस की शह पाकर ठेले वाले ने चौकी पर उस रोडवेज अफसर के खिलाफ तहरीर दे दी। रोडवेज के अफसर दबाव में आ गए और ठेले वालों से कुछ कहना ही छोड़ दिया। ठेले वाले फिर पूरी दबंगई के साथ बस अड्डे के अंदर ठेला लगाने लगे। जब पुलिस की रखवाली में अवैध ठेले और फड़ सजेंगे उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से जगह बेची जाएगी तो कैसे सुधरेगी व्यवस्था।
सेटेलाइट बस अड्डे की सीमा के अंदर के अलावा शाहजहांपुर और पीलीभीत रोड के किनारे ऑटो, टैंपो, डग्गामार जीप, मार्शल, छोटा हाथी, प्राइवेट बसों के अलावा अनाधिकृत ठेले और खोखे वालों का रोजाना लगने वाले जमावड़े के पीछे पुलिस की हर महीने होने वाली लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा की उगाही है। पुलिस का अवैध उगाही का खेल लंबे समय से चल रहा है।
ऐसे होती है उगाही
सेटेलाइट से शहर के अंदर गुजरने वाले वाहनों को ट्रैफिक पुलिस चेकिंग के नाम पर रोकती है। उनसे सड़क के किनारे खोखों की आड़ में ले जाकर सौदेबाजी होती है। जब सौदा पट जाता है तो वाहन चालक को जलजीरा का ठेले वाले के पास भेज दिया जाता है। वाहन चालक ठेले वाले को रुपये देकर चला जाता है। हिसाब शाम को होता है।
खोखे और ठेले से वसूली
सूत्रों के मुताबिक सेटेलाइट के आस-पास लगने वाले फल, गजक, पेठा, पकौड़ी, नाश्ता और खाना बेचने वाले ठेलों से सोनू और सुंदर नाम के दो युवक रोजाना वसूली करते हैं। प्रत्येक खोखे और ठेले वाले से ट्रैफिक और चौकी पुलिस रोजाना 50-50 रुपये वसूलती है। ये पैसा सड़क के किनारे एक खोखे पर जमा होता है। पांच-पांच सौ रुपये दोनों को मेहनताना देने के बाद ये पैसे पुलिस तक पहुंचा दिए जाते हैं।