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महिलाएं बोली- तीन तलाक ऐसे तो नहीं चलेगा

Sat, 10 Dec 2016 01:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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बोलती मुस्लिम महिलाएं - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बरेली की काफी महिलाएं तीन तलाक के मामले में हाईकोर्ट के  फैसले के पक्ष में हैं। उनकी राय में शरीयत में तो कोई बदलाव न हो लेकिन तलाक पर रोक लगे। वह कहती हैं कि  तलाक के बाद महिला की जिंदगी बर्बाद हो जाती है। इस शब्द का दुरुपयोग करने वाले पुुरुष का कुछ नहीं बिगड़ता। असल में परेशान तो महिला ही होती है, वह मेहर से कितना और कब तक गुजारा करेगी। ऐसे में महिलाओं को पति की संपत्ति और आमदनी में से हिस्सा मिलना चाहिए।
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‘तलाक शब्द का आज  दुरुपयोग हो रहा है। जो लोग बिना कोई कारण या छोटी सी बात पर तलाक दे देते हैं ऐसे मामलों के लिए कुछ प्रावधान होना चाहिए। शरीयत में भी बिना ठोस वजह से तलाक पर मनाही है।’
जीनतुल निशां, एमफिल छात्रा रुहलेखंड यूनिवर्सिटी 

‘निकाह और तलाक शरीयत के अनुसार ही होते हैं, लेकिन आज लोग तलाक शब्द का प्रयोग अपने फायदे के लिए कर रहे हैं। छोटी छोटी बातों पर किसी औरत की जिंदगी तबाह कर देना गलत है। इसके लिए जरूर कदम उठाए जाने चाहिए।’
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नाजिश, पीएचडी छात्रा रुहेलखंड यूनिवर्सिटी 
  
‘बिना किसी कारण से तलाक दे देना मेरे हिसाब से गलत है और जब दुनिया में कई जगह तलाक के कानून में संशोधन हो चुके हैं तो हमारे यहां भी होना चाहिए। ऐसा कानून होना चाहिए कि जब तक कोई ठोस वजह न हो तब तक तलाक नहीं होना चाहिए।’
 फराह नाज, एमए की छात्रा 
  
‘तलाक शब्द की मार औरतों को ही झेलनी पड़ती है। तो इस कानून को ऐसा क्यों नहीं बनाया जाता जिससे वाजिब वजह पर ही तलाक हो। बिना किसी ठोस वजह से होने वाले तलाक पर रोक लगनी चाहिए।’
-निदा, बीए की छात्रा 

‘दूसरी शादी के लिए तीन तलाक देना गलत है। इससे बच्चों का भविष्य खराब हो जाता है, महिला सड़क पर आ जाती है। अनपढ़ महिलाओं का सामने तो और ज्यादा परेशानियां होती है, परिवार भी उन्हें ठीक से स्वीकार नहीं करता । तलाकशुदा महिला को सफर मिलना भी मुिश्कल हो जाता है। जबकि पुरुष तो दूसरी शादी कर लेता है। इसलिए हम तीन तलाक के मुद्दे पर हाईकोर्ट के फैसले के साथ हैं’। डा. शाहिदा खान

कुरान में कहीं भी एक साथ तलाक का उल्लेख नहीं है। कुछ उलेमा  कुरान, हदीस और शरीयत की अपनी तरह व्याख्या करके एक साथ तीन तलाक को जायज कह रहे हैं। जबकि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, पुरुष प्रधान देश में महिलाओं को न्याय दिलाने में हाईकोर्ट की अहम भूमिका रही है। ऐसे में हम हाईकोर्ट के आदेश के पक्ष में हैं।’ डा. रोजी जैदी, डायटीशियन, जिला अस्पताल
 
‘तीन तलाक से पीड़ित पीड़ित महिलाओं के लिए हाईकोर्ट का आदेश सही है। मोबाइल और इंटरनेट के जरिए दिया गया तलाक मान्य नहीं होना चाहिए। कोर्ट के इस पर क्रियान्वित कराने सरकार और उलेमाओं को काम करना चाहिए।’ रफत जहां, एडवोकेट
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