परिजनों ने पुलिस को बताया कि कालीचरन ने अपनी बेटी की शादी गांव में ही की थी। करीब एक साल पहले उनकी पत्नी बच्चों और पति को छोड़कर समधी के घर चली गई। तब से वह समधी के ही घर उन्हीं के साथ रह रही है। एक साल बाद पत्नी दिवाली पर कालीचरन के घर लौटी। तब कालीचरन को लगा कि वह अब नहीं जाएगी। हालांकि दो दिन पहले ही पत्नी फिर से समधी के साथ चली गई। इसके बाद कालीचरन अवसाद में आ गए। इसी को लेकर वह गुमसुम रहने लगे।
परिजनों ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह पांच बजे कालीचरन के फोन पर किसी की कॉल आई। इसके बाद वह घर से बाहर निकल गए। रास्ते में उन्होंने दुकान से बीड़ी खरीदी। सुबह छह बजे ग्रामीणों ने देखा कि उनका शव उनके ही खेत में पेड़ से लटका हुआ है।
गांव के लोगों ने परिवार को सूचना दी। मृतक के बेटे पंकज ने थाना पुलिस को जानकारी दी। इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव उतरवाकर जिला मुख्यालय भेज दिया। इंस्पेक्टर ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट व तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
कालीचरन मेहनत मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते थे। उसके दो बेटे पंकज व अरुण हैं। जबकि उसने अपने बेटी रीतू की शादी गांव में कर दी थी।
हिमाचल प्रदेश में पति-पत्नी की तरह रहे
कालीचरन ने अपनी बेटी की शादी करीब दो साल पहले गांव में ही की थी। तब से उनकी पत्नी का झुकाव समधी की ओर हो गया था। एक साल पहले दोनों गांव से चुपचाप चले गए थे और हिमाचल प्रदेश में पति पत्नी की तरह रहने लगे। कुछ महीने पहले ही गांव लौटे थे।
कालीचरन का समधी मूल रूप से सिविल लाइन्स थाना क्षेत्र के गांव शेखूपुर का मूल निवासी है, उसकी ससुराल गांव अल्लापुर में है। उसके कोई साला नहीं था तो दस साल पहले वह ससुराल में परिवार के साथ आकर बस गया। ससुराल में जमीन और मकान भी उसे मिला है। वह राजमिस्त्री का काम करता है।