हर कदम पर कठिनाइयां
नीलम बताती हैं कि दिव्यांगता के कारण हर कदम पर उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वह बस के बजाय ऑटो में ही सफर करती हैं, क्योंकि उसमें किसी के सहारे की जरूरत नहीं पड़ती है। वह बताती हैं कि कोविड काल में पैर में फ्रैक्चर हो जाने के बाद वह अधिक समय तक लिखती हैं तो पैर में सूजन आ जाती है। वह पैर के सहारे से ही सभी कार्य करती हैं।
दोस्तों का रहता है सहयोग
नीलम बताती हैं कि हर कदम पर उन्हें दोस्तों का सहयोग मिला है। स्कूल में भी दोस्तों ने काफी मदद की। कॉलेज में परीक्षाओं के समय भी दोस्त ही उनके जूते खोलते और पहनाते हैं। हाल में ही वह गणित की प्रयोगात्मक परीक्षा देने आई थीं तो दोस्तों ने ही जूते पहनाए। वह कहती हैं कि उनके दोस्त खास हैं। वे उनकी कमजोरी का मजाक नहीं उड़ाते, बल्कि हर कदम पर उनका सहयोग करते हैं।