बरेली। जिला पंचायत बोर्ड का पांच वर्षीय कार्यकाल 12 जुलाई को पूरा हो रहा है। इसके बाद जिला पंचायत का प्रशासन किसके हाथ में होगा, यह बड़ा सवाल है। शासन प्रशासक नियुक्त करेगा या मौजूदा बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाएगा, इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। 11 और 12 जुलाई को सरकारी अवकाश के कारण 10 जुलाई को ही शासन स्तर से निर्णय आने की संभावना है।
जिला पंचायत अध्यक्ष समेत सभी निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल 12 जुलाई को समाप्त हो रहा है। प्रदेश में अभी जिला पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। ऐसे में नए बोर्ड के गठन तक व्यवस्था बनाए रखने के लिए शासन को अंतरिम व्यवस्था करनी होगी। चर्चा है कि यदि कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाता है, तो जिला पंचायत का प्रशासन जिलाधिकारी को प्रशासक के रूप में सौंपा जा सकता है। हालांकि, बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाने की संभावना पर भी चर्चा है, लेकिन कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है।
ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद जिला पंचायतों के मामले में भी शासन कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की तैयारी में है। राजनीतिक दलों और जिला पंचायत सदस्यों की निगाहें अब शासन के फैसले पर टिकी हैं। यदि 10 जुलाई तक आदेश जारी होता है, तो 13 जुलाई से आगे की प्रशासनिक व्यवस्था स्पष्ट हो जाएगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष रश्मि पटेल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विकास की निरंतरता जरूरी है। अगर सरकार जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक के तौर पर जिम्मेदारी सौंपती है, तो यह ग्रामीण विकास की गति को बिना रोके आगे बढ़ाने के लिए एक व्यावहारिक फैसला होगा।