बरेली। सिविल लाइन स्थित आईटीआई काष्ठ कला केंद्र में छात्र-छात्राओं को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एक वर्ष से मुख्य प्रयोगशाला में ताला जड़ा है जिससे छात्र-छात्राएं मशीनों पर प्रैक्टिकल करने के बजाय केवल वीडियो देखकर काम चला रहे हैं। दो महत्वपूर्ण ट्रेड्स की कार्यशालाएं सन् 1911 में बनी अंग्रेजोंं के जमाने की जर्जर इमारतों में संचालित हो रही हैं। इससे छात्र-छात्राओं को खराब माहौल में पढ़ना पड़ रहा है और उनकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
छात्र-छात्राओं को मशीनों पर हाथ आजमाना चाहिए। इलेक्ट्रिशियन, आरएसी और फिटर जैसे ट्रेड्स के छात्र-छात्राएं केवल वीडियो में ही प्रैक्टिकल सीखने को मजबूर हैं। पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव के दौरान संस्थान की प्रयोगशाला को चुनावी कार्यों के लिए बंद किया था और एक वर्ष बीत जाने के बाद भी यह ताला नहीं खुल सका है। लाखों की मशीनें अंदर धूल फांक रही हैं और छात्र-छात्राएं तकनीकी ज्ञान से दूर होते जा रहे हैं।
- 113 साल पुरानी इमारत में चल रही कार्यशाला
संस्थान के कारपेंटर और मैकेनिक ट्रेड्स की कार्यशालाएं सन 1911 में निर्मित इमारत में संचालित हो रही हैं। छात्रों ने बताया कि वर्ष 2017 में नाम मात्र की मरम्मत हुई थी लेकिन अब इमारत फिर से जर्जर हो गई है। कहीं टिनशेड टूटा हुआ है तो कहीं दरवाजे खराब हालत में हैं। कार्यशाला में रखी मशीनें भी बीते जमाने की हो चुकी हैं जो आधुनिक औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में अक्षम हैं। इस खराब और असुरक्षित माहौल में छात्रों को प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है। संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था भी कम चिंता का विषय नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि रात के समय परिसर की सुरक्षा करना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि अंदर से ही वन विभाग के लिए भी रास्ता जाता है। प्रबंधन की ओेर से कई पुरानी इमारतों की जगह पर छात्रावास और कर्मचारियों के लिए कमरे बनाने की कवायद की जा रही है। शिक्षकों का मानना है कि कर्मचारियों के आवास बनने के बाद ही कैंपस की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी। संस्थान के अंदर जाने वाली सड़क का प्रस्ताव ही पारित हो सका है। संवाद
- शासन को लगातार हो रहा पत्राचार : प्रधानाचार्य
इस पूरे मामले पर प्रभारी प्रधानाचार्य टीकम शरण ने बताया कि कॉलेज की इमारतों के जीर्णोद्धार के लिए शासन को लगातार पत्राचार किया जा रहा है और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। बंद पड़ी प्रयोगशाला के संबंध में भी जिलाधिकारी कार्यालय में पत्र लिखा था लेकिन पंचायत चुनाव शुरू होने के कारण इसे फिर से चुनाव केंद्र बना दिया है। बहरहाल पत्राचार और प्रस्तावों के बीच छात्रों का भविष्य जर्जर इमारतों और बंद पड़ी मशीनों के साए में है जिसके जल्द समाधान की आवश्यकता है।