बरेली कॉलेज पुस्तकालय का डिजिटलीकरण स्टाफ और बजट की कमी के कारण अधर में लटक गया है, इस कारण नैक मूल्यांकन से पहले बरेली कॉलेज पुस्तकालय का डिजिटलीकरण एक चुनौती बन गया है। हजारों किताबों के डिजिटलीकरण का काम रुका हुआ है, जबकि छत की अधूरी मरम्मत से दुर्लभ पुस्तकों को भी खतरा है।
पुस्तकालय में पांच तकनीकी स्टाफ के पद खाली हैं, जिनमें सर्कुलेशन, रेप्रोग्राफिक सेंटर और कैटालॉगिंग के पद शामिल हैं। इन पदों पर अब तक कोई नियुक्ति नहीं हुई है, जिससे डिजिटलीकरण और आधुनिक प्रक्रियाओं में बाधा आ रही है। बीलिब और एमलिब के विद्यार्थी अस्थायी रूप से डाटा फीडिंग में सहायता कर रहे हैं, जिन्हें अनुभव प्रमाण पत्र दिए जाते हैं। पुस्तकालय के रखरखाव के लिए मात्र तीन लाख रुपये का बजट है। इसी राशि से एनईपी की नई किताबें भी मंगाई गई हैं। इस सीमित बजट के कारण नई, पुरानी और दुर्लभ किताबों का डिजिटलीकरण मुश्किल हो रहा है। इश्यू और रिटर्न जैसी प्रक्रियाएं ऑनलाइन नहीं हो पा रही हैं, हालांकि किताबों की जानकारी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम उपलब्ध है। पुस्तकालय अध्यक्ष शकुंतला देवी ने बताया कि नैक मूल्यांकन में अभी समय है और पुस्तकालय को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं।
छत की मरम्मत अधूरी, दुर्लभ किताबों पर खतरा
पुस्तकालय की छत की मरम्मत अधूरी होने से बारिश और हवा के कारण किताबों पर धूल जम रही है। पुस्तकालय में फारसी और संस्कृत के लेखकों की कई दुर्लभ किताबें मौजूद हैं। अधूरी मरम्मत के चलते इन महत्वपूर्ण किताबों को पानी और आंधी से नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है। स्टाफ और बजट की कमी के कारण इन दुर्लभ पुस्तकों का उचित रखरखाव भी प्रभावित हो रहा है। पुस्तकालय समिति की बैठक में स्टाफ की कमी पर चर्चा हुई थी लेकिन आउटसोर्स के स्टाफ की भर्ती अब तक नहीं हो पाई है।