अभिकरण ने सीज कर दिया था डीआईजी का खाता
बताया जा रहा है कि शासन/पुलिस विभाग ने अभिकरण के आदेश को उच्च न्यायालय इलाहाबाद में चुनौती दी थी। फिर प्रकरण हाईकोर्ट में विचाराधीन बताकर याची विमला देवी को भुगतान करने से इन्कार कर दिया था। इस पर तीन सितंबर 2024 को अभिकरण ने डीआईजी के बैंक खाते को सीज कर दिया था। इस खाते को चालू कराने के संबंध में अभिकरण में पैरवी के लिए एसएसपी ने 18 नवंबर 2024 को जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) पुरुषोत्तम सिंह को पत्र लिखा था।
वीरावती को भी नहीं किया 4.58 लाख का भुगतान
वीरावती की याचिका पर भी दो अप्रैल 2013 को फैसला आया था। इसमें कहा गया था कि डीआईजी वीरावती को 4.58 लाख रुपये अदा करें, पर अभी तक ऐसा नहीं किया गया। अभिकरण के पीठासीन अधिकारी क्षितिज कुमार श्रीवास्तव ने 21 जुलाई को डीएम को पत्र लिखकर कहा है कि क्षतिपूर्ति की धनराशि याचिका प्रस्तुत करने की तिथि से प्रतिकर भुगतान तक सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से वसूलकर अभिकरण में जमा कराएं।
डीएम अविनाश सिंह ने बताया कि प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है। न ही इस संबंध में मेरे सामने कोई पत्र आया है। फिर भी इसकी जानकारी कर आदेश का अनुपालन कराएंगे।
यह है मामला
मीरगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत पिपरिया मुस्तकीम के गांव छोटी पिपरिया निवासी नंदराम और चनेहटा के पप्पू सस्ते गल्ले के विक्रेता थे। वर्ष 2009 में दोनों बाइक से बरेली से घर लौट रहे थे। पप्पू का नाबालिग बेटा भी बाइक पर सवार था। फतेहगंज पश्चिमी के पास ठिरिया मोड़ पर डीआईजी की गाड़ी से बाइक में टक्कर हो गई थी।
हादसे में बाइक सवार तीनों लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद नंदराम की पत्नी विमला देवी और पप्पू की पत्नी वीरावती ने मोटर दुर्घटना दावा अभिकरण में 20 अक्तूबर 2009 को याचिका दाखिल की थी। इस पर वर्ष 2013 में निर्णय आया। इसके बावजूद पीड़ित पक्ष क्लेम पाने के लिए संर्घषरत है। क्लेम की अदायगी नहीं होने पर पीठासीन अधिकारी क्षितिज कुमार श्रीवास्तव ने चार जनवरी 2024 को आरसी जारी की थी।