बरेली। शहर की उभरती हुई पावरलिफ्टर खुशी गुप्ता की कहानी संघर्ष और अटूट साहस की एक मिसाल है। पिता के साये के उठ जाने और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने न केवल खुद को संभाला, बल्कि खेल की दुनिया में अपनी एक मजबूत पहचान बनाई। खुशी के इस सफर की शुरुआत जूडो से हुई थी, जहां उन्होंने राज्य स्तर पर कई पदक जीते, लेकिन परिस्थितियों के कारण उन्हें वह खेल छोड़ना पड़ा। वजन बढ़ने की समस्या के चलते जब उन्होंने जिम का रुख किया, तो पावरलिफ्टिंग उनके जीवन का नया मोड़ बन गया।
खुशी के जीवन का सबसे कठिन दौर 2016 में आया जब उनके पिता, जो पेशे से हलवाई थे, का बीमारी के कारण निधन हो गया। घर की माली हालत खराब होने पर खुशी ने खेल छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन उनके बड़े भाई जितेंद्र ने उनकी हिम्मत को टूटने नहीं दिया। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी खुशी को प्रैक्टिस के लिए रोज पांच किलोमीटर साइकिल चलानी पड़ती थी और समाज के तानों का सामना करना पड़ता था, लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
उनकी मेहनत का फल उन्हें साल 2023-24 की लखनऊ पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में मिला, जहां उन्होंने स्वर्ण पदक के साथ स्ट्रांग विमेन का खिताब अपने नाम किया। इसके अलावा उन्होंने रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी ग्रैपलिंग प्रतियोगिता में दो स्वर्ण और ऊषा फिटनेस स्टूडियो की सीनियर चैंपियनशिप में भी शानदार सफलता हासिल की। वर्तमान में परास्नातक की पढ़ाई कर रहीं खुशी अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराने और देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने का सपना देख रही हैं।