अनियंत्रित डायबिटीज मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। ऐसे मरीजों में अवसाद, चिड़चिड़ापन, भूलने की प्रवृत्ति, आक्रामकता बढ़ने की आशंका रहती है। भोजीपुरा स्थित एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में चल रहे दो दिवसीय यूपीसीसीडीएसआईकॉन में व्याख्यान देने आए आगरा मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. पीके माहेश्वरी ने रविवार को ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि डायबिटीज को शरीर का चोर कहते हैं। शुरुआत में लक्षण स्पष्ट नहीं होते। कई बार मरीज हृदय, किडनी या किसी बीमारी के दौरान जब रक्त की जांच कराते हैं तो डायबिटीज का पता चलता है। बढ़ी हुई शुगर मस्तिष्क की रक्त नलिका और रसायनों को प्रभावित करती है।
इससे मानसिक संतुलन बिगड़ता है। मरीज सामान्य बातें भूलने लगते हैं। व्यवहार में बदलाव आने लगता है। सामाजिक रूप से असहज हो जाते हैं। कई मामलों में नौकरी और पारिवारिक रिश्तों पर भी असर पड़ता है। इसलिए प्रत्येक सप्ताह सामाजिक गतिविधि या रिश्तेदारी में जाना भी जरूरी है।
डॉ. माहेश्वरी के मुताबिक, नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान, समय पर दवा और जांच से शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने व्रत और त्योहार में अधिक कार्बोहाइड्रेट, तले भोजन से बचने की सलाह दी। कहा कि सरकारी अस्पतालों पर मुफ्त दवा और जांच की सुविधा है।
पेटेंट खत्म होने के बाद डायबिटीज की दवाएं दस गुना सस्ती हुई हैं। मरीजों को इसका लाभ लेना चाहिए। उन्होंने बाइक चलाने के दौरान हेलमेट में मोबाइल फोन फंसाकर बात नहीं करने की अपील की।