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धर्मदत्त सिटी अस्पताल: नगर निगम ने सीएम को भेजी रिपोर्ट

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बरेली। धर्मदत्त सिटी अस्पताल पर कब्जा लेने की कोशिश कर रहे नगर निगम ने इस मामले में सियासी दखलंदाजी बढ़ने पर डीएम के माध्यम से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी है। मुख्यमंत्री कार्यालय से मार्गदर्शन भी मांगा गया है।
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नगर निगम की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि म्यूनिसिपल बोर्ड ने आठ अप्रैल 1910 को ग्राम उदयपुर खास की भूमि का अधिग्रहण किया था। 18 अक्तूबर 1945 को धर्मदत्त शर्मा वैद्य ने म्यूनिसिपल बोर्ड के तत्कालीन सभापति को पत्र लिखकर आयुर्वेदिक अस्पताल बनाने के लिए यह जमीन लीज पर देने का आग्रह किया। 30 नवंबर 1945 को दस रुपये सालाना किराए पर 90 वर्ष के लिए यह जमीन उन्हें लीज पर दे दी गई। लीज की तमाम शर्तों में एक शर्त यह भी थी कि हर 30 साल बाद लीज का नवीनीकरण कराना होगा लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने लीज का नवीनीकरण नहीं कराया है।
शर्तों का उल्लंघन होने पर एक नवंबर 2002 को तत्कालीन नगर आयुक्त ने लीज निरस्त करने के लिए धर्मदत्त वैद्य के बेटे भूपेंद्र नाथ शर्मा को नोटिस दिया और फिर छह मार्च 2003 को तत्कालीन नगर निगम बोर्ड ने लीज निरस्त कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए वर्ष 2016 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई जिसे खारिज कर दिया गया।
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वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट में भी नगर निगम के पक्ष में फैसला हुआ। नगर निगम ने अस्पताल पर दो बार कब्जा लेने का भी प्रयास किया लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने विरोध कर करके उनकी लगाई सील भी तोड़ दी। थाना प्रेमनगर में दोनों पक्षों की ओर से रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई है। इस जमीन की मौजूदा कीमत 20 करोड़ रुपये से ज्यादा है। नगर आयुक्त अभिषेक आनंद ने बताया कि पूरे मामले की रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी गई। वहां से मिले निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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