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अमीन की धमकी से किसान की जान चली गई

Thu, 27 Aug 2015 01:44 AM IST
बरेली
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बरेली। बैंक के 55 हजार रुपये की वसूली के चक्कर में अमीन ने किसान को इतना परेशान किया कि उसकी जान चली गई। छह साल पहले बैंक से लिए गए 24 हजार रुपये का कर्जा ब्याज सहित 55 हजार रुपये हो गया था। इस रकम को वसूलने के लिए अमीन ने  जेल धमकी दी तो किसान कोे ब्रेन हैमरेज हो गया। दो दिन रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहने के दौरान बुधवार को सुबह किसान मौत हो गई। गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने अमीन के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट गेट पर शव रखकर प्रदर्शन किया ।
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मृतक 55 वर्षीय किसान रामबहादुर कैंट थाना क्षेत्र के लालपुर गांव के निवासी थे। उन्होंने 2009 में गन्ना बोने के लिए  बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की क्यारा शाखा से 24 हजार रुपये कर्ज लिया था।  एक जनवरी 2012 को 31,114 रुपये वसूली के लिए रामबहादुर के खिलाफ आरसी जारी की गई थी। यह पैसा ब्याज के साथ बढ़कर फिलहाल 55 हजार रुपये हो गया था। परिवार वालों ने बताया कि 22 अगस्त को अमीन राकेश कुमार सिंह घर आया और कर्ज माफ कराने की बात कहकर बैंक आने को कहा।  रामबहादुर जब बैंक गए तो अमीन और मैनेजर ने कहा कि 30 अगस्त तक सारा पैसा जमा नहीं किया तो जेल जाना होगा। इससे रामबहादुर की तबियत बिगड़ गई। सोए तो उठे नहीं। परिजनों ने उन्हें 24 अगस्त को शहर के रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान बुधवार को सुबह उनकी मौत हो गई। परिवार वालों का कहना है कि डाक्टरों ने सदमे में ब्रेन हैमरेज हो जाने की बात कही। इसके बाद गुस्साए परिवार वाले और ग्रामीण ट्रेक्टर - ट्राली से रामबहादुर का शव लेकर पहले कैंट थाने गए और फिर दोपहर करीब एक बजे कलेक्ट्रेट पहुंच गए। यहां गेट के सामने उन्होंने शव जमीन पर रख लिया और अमीन के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग पर अड़ गए। सिटी मजिस्ट्रेट उमेश कुमार मंगला ने पहले तो कार्रवाई करने से साफ इंकार कर दिया लेकिन एक घंटे चले प्रदर्शन के बाद पोस्टमार्टम के लिए शव भिजवाते हुए उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही कानूनी कार्रवाई कराने की बात कही। उन्होंने इस मामले की एसडीएम सदर से जांच कराने का आश्वासन भी दिया।

इंसेट...

जबरन वसूली पर तो रोक है
बरेली। ओलावृष्टि के चलते प्रदेश सरकार ने किसानों के खिलाफ की जाने वाली उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर 31 अक्टूबर तक के लिए रोक लगा दी गई थी। इसके बावजूद अमीन किसान राम बहादुर का उत्पीड़न करने पहुंच गए। उन्होंने एक जनवरी 2012 की आरसी के आधार पर बैंक ने प्रबंधक और अमीन दोनों ने 55 हजार रुपये वसूलने को दबाव बनाया था। हालांकि तहसीलदार (सदर) खालिद अंजुम का कहना है कि तहसील से आरसी जारी नहीं की गई है। बैंक ने अपने स्तर से साइटेशन नोटिस जैसी कार्रवाई की होगी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि किसान के खिलाफ आरसी जारी नहीं हुई है। जबकि बैंक प्रबंधक ने अपने अभिलेखों में आरसी की एक प्रति लगा रखी है।
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सवा करोड़ के हैं 267 बकाएदार
बरेली। जिले में सवा करोड़ रुपयों के 267 बड़े बकाएदारों के खिलाफ वसूली के लिए उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। इन बकाएदारों को वसूली जारी करने वाले विभाग और तहसील स्टाफ आरसी के खिलाफ किसी न किसी अदालत से मदद करके स्थगनादेश दिला देता है। करीब दस साल पुराने उद्योग, यूपीएफसी, बैंक तथा अन्य वित्तीय संस्थानों के इन बकाएदारों ने जिला न्यायालय के अलावा हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट से वसूली के खिलाफ स्थगनादेश ले रखा है। इनके अलावा 125925 किसान, व्यापारी तथा अन्य लोगों से सवा पांच करोड़ रुपये की वसूली के लिए आरसी जारी की गईं हैं।

आत्मदाह की धमकी दी तो हरकत में आए
कलेक्ट्रेट गेट के सामने जमीन पर एक घंटे तक रामबहादुर का शव रखा रहा। सिटी मजिस्ट्रेट ने इसे सामान्य मौत बताया तो रामबहादुर के बेटे अशोक ने ऐलान कर दिया कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो उसके सारे परिजन कलेक्ट्रेट गेट पर आत्मदाह कर लेंगे। प्रदर्शन की सूचना पर ग्रामीणों की ओर से कलेक्ट्रेट पर भाजपा जिलाध्यक्ष राजकुमार शर्मा, भाजपा नेता चौधरी तेजा गुर्जर और कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामदेव पांडेय भी मृतक के पक्ष में पहुंच गए और उन्होंने वार्ता के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट से अमीन के खिलाफ कार्रवाई को कहा।

छावनी बन गया कलक्ट्रेट
प्रदर्शन के दौरान शहर के सभी थानों की पुलिस फोर्स कलेक्ट्रेट गेट पर बुला ली गई। आरएएफ के जवानों को भी बुलाया गया। कई पुलिस क्षेत्राधिकारी भी पहुंच गए। फायर बिग्रेड भी आ गई। इसके चलते करीब डेढ़ घंटे तक कलेक्ट्रेट गेट छावनी में तब्दील हो गया। जब शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने के बाद ही अिफसरों ने राहत की सांस ली। वहीं, इस दौरान कलेक्ट्रेट का मेन गेट बंद कर लिया गया था। इससे किसी काम से वहां आए सारे लोगों और अफसरों की गाड़ियां अंदर ही फंसी रहीं।

प्रशासन दिलाएगा आर्थिक मदद
मृतक रामबहादुर के सात बेटियां हैं और दो बेटे।  तीन बेटियों की शादी होनी है। ग्रामीणों ने सिटी मजिस्ट्रेट से मौत के लिए मुआवजा दिलाने को कहा तो सिटी मजिस्ट्रेट ने पारिवारिक लाभ योजना से 30 हजार रुपये और मुख्यमंत्री सहायता कोष से आर्थिक मदद भी दिलाने का आश्वासन दिया। बाद में ग्राम प्रधान कृष्णपाल एडीएम प्रशासन अरुण कुमार से मिले तो उन्होंने भी कहा कि आर्थिक मदद कराई जाएगी।
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