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42 करोड़ मिलें, तभी पूरी होंगे अल्पसंख्यकों के काम

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यूपीए सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों को शिक्षा, विकास और रोजागर के लिए शुरु की गई बहु क्षेत्रीय विकास योजना बरेली में ठहर गई है। डेढ़ साल से  एक धेला तक रिलीज नहीं हुआ है। एक अरब रुपये के दो दर्जन से अधिक काम अधूरे पड़े हैं। इनके लिए 60 करोड़ तो मिल गए लेकिन पूरा कराने के लिए 42 करोड़ रुपयों की दरकार है। डीएम-कमिश्नर की सिफारिश पर मुख्य सचिव ने केंद्र सरकार को बरेली सहित दो दर्जन जिलों के लिए अधूरे कामों को पूरा कराने के लिए धनराशि मांगी है। दूसरी ओर केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग इन कामों के लिए धनराशि तो रिलीज नहीं कर रहा है लेकिन आश्वासन जरूर मिल रहे हैं।
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सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मुस्लिमों के सामाजिक, शैक्षिक तथा अन्य स्तरों में सुधार के लिए 50 फीसदी या उससे अधिक मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा आदि के क्षेत्र में काम कराने के प्रस्ताव मांगे थे। बरेली में चरणवद्ध  काम कराने के लिए कई अरब के प्रस्ताव भेजे गए थे। तीन साल पहले इनमें से पहले फेज में एक अरब रुपये से दो दर्जन कामों को कराने का प्रस्ताव भेजा गया था। जिन्हें मंजूर करते हुए पहले फेज में डेढ़ साल पहले 60 करोड़ रुपये जारी कर दिए। अवशेष 42 करोड़ रुपये पिछले साल अक्टूबर तक मिलने थे लेकिन यह रकम नहीं दी गई।
ये हैं काम
- मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में 59 आंगनबाड़ी केंद्र, सेंथल में पॉलिटेक्निक, बहेड़ी में आईटीआई, शीशगढ़ में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 12 इंटर कालेज। रिठौरा में सीएचसी, सात ब्लाकों के गांवों में 20 ओवर हैड टैंक।
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