सेतु निगम और पीडब्ल्यूडी के अफसरों की मंशा भांपकर रक्षा संपदा विभाग ने रक्षा मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव
बरेली। लाल फाटक ओवरब्रिज निर्माण के लिए सेना की एनओसी हासिल करने की उम्मीदें धराशायी हो चुकी हैं। वहीं अब शुरू हुई वर्किंग ऑर्डर लेने की कवायद भी अफसरों की सुस्त रफ्तार से परवान चढ़ती नहीं दिख रही। रक्षा संपदा विभाग के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय को भेजे गए वर्किंग ऑर्डर के प्रस्ताव को लेकर कार्यदायी संस्था को मंत्रालय में मजबूत पैरवी करनी होगी, लेकिन अब तक उन्होंने इस बाबत कोई पहल नहीं की है। लिहाजा निर्माण कार्य लंबे समय से रुका हुआ है।
रक्षा संपदा अधिकारी कौशल गौतम ने बताया कि सैन्य अथवा कैंट क्षेत्र में होने वाले सिविल निर्माण कार्य के लिए रक्षा मंत्रालय से एनओसी अथवा वर्किंग ऑर्डर जरूरी होता है। बताया कि पिछले वर्षों में लाल फाटक ओवरब्रिज निर्माण के लिए प्रशासन और सेतु निगम की ओर से ली जाने वाली एनओसी ने कई खामियां रह गई हैं।
उन्होंने प्रस्ताव में एनओसी तो मांगी, लेकिन वर्किंग ऑर्डर का जिक्र नहीं किया। इससे मामला फंस गया। हालांकि इस संदर्भ में भी कई बार प्रशासन और सेतु निगम के अफसरों को तत्कालीन डीईओ ने चेताया, लेकिन प्रस्ताव में सुधार करने के बजाय वर्किंग ऑर्डर लेने के लिए ही प्रयास होते रहे। करीब साल भर गुजरने के बाद जमीन के बदले जमीन देने की कार्यवाही शुरू हुई वह भी सफल नहीं हुई। फिर लीज पर जमीन लेने का मामला भी अटक गया। क्योंकि रक्षा मंत्रालय की गाइड लाइन के मुताबिक जमीन के बदले जमीन देने पर ही सैन्य भूमि के उपयोग की हरी झंडी मिल सकती है। मामला अटकते देख रक्षा संपदा विभाग ने खुद पहल करते हुए ओवरब्रिज निर्माण के लिए सेतु निगम के अफसरों को पत्र लिखकर सेना और कैंट को जनहित में वर्किंग ऑर्डर लेने का सुझाव दिया। इसके बाद वर्किंग ऑर्डर लेने की प्रक्रिया शुरू हुई।
सेतु निगम ने राज्य सरकार को वर्किंग ऑर्डर लेने के लिए पत्र लिखने का दावा किया है। काफी इंतजार के बाद भी वर्किंग ऑर्डर जब रक्षा मंत्रालय नहीं पहुंचा तो वर्ष 2019 की शुरुआत में तत्कालीन डीईओ ने रक्षा मंत्रालय को वर्किंग ऑर्डर के संबंध में पत्र लिखा। हालांकि अब तक इस पत्र पर मंत्रालय से कोई जवाब नहीं मिला है।
जिसे चाहिए सैन्य भूमि उसे करनी है पहल
डीईओ गौतम का कहना है कि वर्किंग ऑर्डर के मामले में सेतु निगम और पीडब्ल्यूडी की अनदेखी भारी पड़ रही है। बताया कि रक्षा मंत्रालय के नियमानुसार वर्किंग ऑर्डर जिसे चाहिए उस विभाग को रक्षामंत्रालय में संपर्क कर संबंधित समस्याओं की जानकारी देते हुए जनहित में ऑर्डर मांगना चाहिए था, लेकिन इस मामले में दोनों ही विभागों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहा है। बताया कि हाल ही में रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया गया तो वहां पर किसी भी विभाग की मौजूदगी नहीं होने की जानकारी मिली है। कहा, नियमों के अनुरूप सेतु निगम के बजाय पीडब्ल्यूडी को वर्किंग ऑर्डर लेने का प्रयास करना होगा। क्योंकि सेतु निगम महज कार्यदायी संस्था है, आखिर में ओवरब्रिज की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को ही संभालनी होगी।