बरेली। गुजरात में आयोजित राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में शहर की दो महिला खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। दोनों खिलाड़ी खेल में सक्रिय होने के साथ-साथ स्कूल में भी कार्यरत हैं और बच्चों को पढ़ाने का दायित्व निभाती हैं। अनुपमा और कविता की यह सफलता शहर की उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो घरेलू और पेशेवर जिम्मेदारियों के कारण अपने सपनों को पूरा करने में हिचकिचाती हैं। दोनों खिलाड़ियों ने दिखा दिया कि अगर दृढ़ निश्चय हो तो समय कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।
कोरोना काल में शुरू की फिटनेस यात्रा
आशुतोष सिटी निवासी 33 वर्षीय अनुपमा सिरोही सेक्रेड हार्ट्स स्कूल में अध्यापिका हैं। वह बताती हैं कि कोरोना काल में जब लोग घरों में सीमित थे, तब उन्होंने घर पर ही जिम उपकरणों की मदद से कसरत शुरू की। लॉकडाउन खत्म होने के बाद उन्होंने जिम जाकर पावरलिफ्टिंग का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। स्कूल में पढ़ाने और ट्यूशन क्लास लेने के बाद वह रोजाना तीन घंटे जिम में पसीना बहाती हैं। अनुपमा ने समय का सही उपयोग करते हुए कभी खेल से दूरी नहीं बनाई। इसी का नतीजा है कि वह वर्ष 2021 में चंदौसी में आयोजित राज्य स्तरीय पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। झारखंड में राष्ट्रीय स्तर पर भी विजेता रह चुकी हैं, और अब गुजरात में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 287.5 किलोग्राम वजन उठाकर, स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। वह अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुटी हैं। साथ ही, जिम में अन्य खिलाड़ियों को पावरलिफ्टिंग की तकनीक और बारीकियां भी सिखाती हैं, ताकि नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिल सके।
किक बॉक्सिंग से पावरलिफ्टिंग की ओर बढ़ाया कदम
सिटी स्टेशन के पास रहने वाली 23 वर्षीय कविता, बचपन से ही खेलों में रुचि रखती हैं। उन्होंने ताइक्वांडो, मार्शल आर्ट्स और किक बॉक्सिंग में भी अपना कौशल दिखाया है। चार राष्ट्रीय स्तरीय किक बॉक्सिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बाद उनका रुझान पावरलिफ्टिंग की ओर हुआ।
वर्तमान में वह व्यास वर्ल्ड स्कूल में पीटीआई के पद पर कार्यरत हैं। कविता बताती हैं कि परिवार से उन्हें पूरा सहयोग और प्रेरणा मिलती है। स्कूल से आने के बाद बच्चों को पढ़ाने का काम पूरा कर, वह शाम पांच बजे से रात आठ बजे तक जिम में अभ्यास करती हैं। गुजरात में आयोजित राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में उन्होंने 63 किलो भार वर्ग में 297.5 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। साथ ही, सबसे ज्यादा स्क्वाट लगाकर नया रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। कविता का कहना है कि लगातार मेहनत और सही मार्गदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता हासिल की जा सकती है। संवाद