आंवला। सूने पडे गेंहू खरीद केंद्र-संवाद
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आंवला। तमाम कोशिशों के बावजूद भी सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद में तेजी नहीं आ पा रही है। इससे अब तक इन केंद्रों पर 40 प्रतिशत ही गेहूं की खरीद हो सकी है। वहीं, दूसरी ओर इन केंद्रों की तुलना में किसान निजी मंडी में अधिक पहुंच रहे हैं। वे यहां आढ़तियों को समर्थन मूल्य से अधिक पर गेहूं बेच रहे हैं। यही कारण है कि लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 67 हजार क्विंटल यानी 42 प्रतिशत ही गेहूं की खरीद हो सकी है।
इस समय किसान अपनी गेहूं की फसल बेचने में लगे हैं। तहसील क्षेत्र में कुल 21 गेहूं क्रय केंद्र हैं। इन केंद्रों सहित मंडी परिसर में आठ सरकारी क्रय केंद्रों पर भी गेहूं की खरीद की जा रही है। सरकार ने इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये निर्धारित किया है, जबकि बुधवार को आढ़तियों के यहां गेहूं का भाव 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा। यही कारण है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। दूसरी वजह यह भी है कि निजी मंडी में किसानों को भुगतान भी हाथों-हाथ मिल रहा है, जिससे वह अपनी जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं, जबकि सरकारी क्रय केंद्रों पर खातों में भुगतान भेजने की व्यवस्था है। संवाद
किसानों से संपर्क कर किया जा रहा जागरूक : रोहिताश कुमार
क्षेत्रीय विपणन अधिकारी रोहिताश कुमार का कहना है कि गेहूं खरीद की रफ्तार बढ़ाने के लिए किसानों से संपर्क किया जा रहा है। गांव-गांव जाकर भी गेहूं खरीदने के अलावा मंडी में गेहूं बेचने आ रहे किसानों को भी प्रेरित किया जा रहा है। दूसरी ओर पिछले कुछ दिनों से आंधी-पानी और सहालग होने के कारण भी किसान गेंहू क्रय केंद्रों पर नहीं आ पा रहे है।