Despite economic growth, malnutrition is still a problem
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चार्ल्स एच. डाईसन स्कूल ऑफ अप्लाइज इकोनामिक्स एंड मैनेजमेंट ( टाटा कार्नेल विश्वविद्यालय) के प्रोफेसर प्रभु पिंगाली ने कहा कि भारत में आर्थिक विकास के बावजूद कुपोषण अब भी समस्या बना हुआ है। उन्होेंने कहा कि हम लोगों की जिम्मेदारी है कि किसानों को कृषि से अधिक पोषण के लिए शोध करें।यह देखना होगा कि कृषि से कैसे अधिक पोषण प्राप्त किया जाए। किसानों को भी चाहिए कि वह परंपरागत धान, गेहूं और दाल के स्थान पर फल-फूल और पशु उत्पादों की ओर भी काम करें क्योंकि इनके मूल्य परंपरागत फसलों से कहीं अधिक मिलते हैं।
आईवीआरआई में कांफ्रेंस के दौरान खेती में महिलाओं के योगदान पर देश की पांच प्रमुख कृषि अर्थशास्त्री महिलाओं ने टिप्स दिए। साथ ही अपने शोध के माध्यम से बताया कि वह किस तरह से खेती में अपने परिवार की आमदनी बढ़ा सकती हैं। टाटा कार्नेल कृषि एवं पोषण संस्थान की समन्वयक एवं वरिष्ठ अर्थशास्त्री सुरभि मित्तल ने कहा कि महिलाओं की खेती में बराबर की भागीदारी है। उनके महत्व को कम नहीं किया जा सकता है लेकिन खेती किसानी में महिलाओं के काम नियोजित हो। इंटरनेशन क्राप रिसर्च इंस्टीट्यूट फार द सेमी एरिड ट्रापिक्स की डा, आर पद्मजा, इस्ट अंलिया विवि की ममता प्रधान, सेंटर फार वूमेन डवलपेंट स्टडीज की प्रोफेसर डिंपल ट्रेसा ने कृषि उत्पादन में महिलाओं की भूमिका के बारे में शोध प्रस्तुत किए। साथ में सुझाव दिए, जिन पर केंद्रीय कृषि मंत्रालय अमल करे। इस अवसर पर निदेशक आरके सिंह ने उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी।