हालांकि, सहकारी बैंक तीन करोड़ से अधिक धनराशि की एफडी पर 7.51 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दे रहा है, जबकि अन्य कोई भी बैंक इतना ब्याज नहीं दे रहा है। उधर, 25 सितंबर 2023 को गन्ना आयुक्त प्रभु एन सिंह की तरफ से भी सहकारी गन्ना समितियों के बैंक खातों के रखरखाव के संबंध में राष्ट्रीयकृत कॉमर्शियल बैंकों के साथ जिला सहकारी बैंक को भी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
कब बंद हो जाएं... सहकारी बैंकों का कोई भरोसा नहीं
उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र का कहना है कि लखीमपुर खीरी, गोंडा, बस्ती व हरदोई में जिला सहकारी बैंक की शाखाएं बंद हो गई हैं। बस्ती जिले की सहकारी बैंक की एक शाखा में गन्ना सोसाइटी का 27 लाख रुपये था। यह बैंक शाखा बंद हो गई, इसलिए इन बैंक शाखाओं का कोई भरोसा नहीं है कि ये कब बंद हो जाएं।
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उन्होंने बताया कि मुख्यालय से ही कहा गया है कि सहकारी बैंकों में एफडी न रखिए, खाता भी बंद कर दीजिए, लेकिन सहकारी बैंक में खाता रखना इसलिए मजबूरी है, क्योंकि किसानों को खाद व बीज के लिए नाबार्ड से मिलने वाला ऋण सहकारी बैंक के माध्यम से मिलता है। उप गन्ना आयुक्त ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंक में भले ब्याज कम हो, मगर गन्ना समितियों का पैसा सुरक्षित तो है।
जिला सहकारी बैंक उप महाप्रबंधक सर्वेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि गन्ना आयुक्त के स्पष्ट निर्देश हैं कि जो बैंक सबसे अधिक ब्याज दे, उसके यहां गन्ना समितियों और विकास परिषद धनराशि जमाकर एफडी कराएंगी। इसके बाद भी उप गन्ना आयुक्त ने सहकारी बैंक से एफडी तुड़वाने का आदेश जारी कर दिया है। जबकि, सहकारी बैंक सर्वाधिक ब्याज दे रही है।