बरेली। तीन सौ बेड अस्पताल में मरीजों का दर्द कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। फिजिशियन पहले ही अवकाश पर हैं, अब दंत चिकित्सक के छुट्टी पर जाने से सन्नाटा पसर गया है। बुधवार को ओपीडी में ढाई सौ ही मरीज पहुंचे। जबकि, आम दिनों में यह ओपीडी सात सौ के करीब होती है।
अस्पताल में त्वचा रोग ओपीडी बीते माह से ठप है। दस दिन पूर्व फिजिशियन के अवकाश पर जाने से अब मेडिसिन संबंधी ओपीडी प्रभावित है। रैबीज क्लीनिक प्रभारी पर ही ओपीडी की भी जिम्मेदारी है। दंत रोग चिकित्सक के भी मेडिकल लीव पर जाने से बुधवार को दंत संबंधी पहुंचे रोगियों को जिला अस्पताल भेजा गया। सिर्फ रैबीज क्लीनिक में कुत्ते के हमले से घायल करीब डेढ़ सौ और करीब सौ मरीज नेत्र रोग ओपीडी में पहुंचे। कक्षों में ताला लगने से अघोषित अवकाश की स्थिति रही। रैबीज क्लीनिक और त्वचा रोग कक्ष के सामने ही मरीजों की कतार थी।
सीएमएस डॉ. इंतजार हुसैन के मुताबिक अगर चिकित्सक अवकाश पर गए हैं, तो जब तक स्वस्थ न हो जाएं, उन्हें बीच में बुलाया नहीं जा सकता। त्वचा रोग ओपीडी का संचालन बंद है। दंत चिकित्सक के अवकाश पर जाने से मरीजों को जिला अस्पताल भेजना पड़ रहा है।
करीब सात सौ मरीजों की प्रतिदिन होती थी ओपीडी
तीन सौ बेड अस्पताल में सबसे ज्यादा फिजिशियन और त्वचा रोग संबंधी मरीज पहुंचते हैं। इधर, चिकित्सकों के अवकाश पर जाने की जानकारी से ओपीडी पहले आधे से ज्यादा खाली हो गई। अब दंत चिकित्सक के अवकाश पर होने से करीब सौ मरीज और घट गए। रैबीज क्लीनिक के प्रभारी पर दो जिम्मेदारी होने से फिजिशियन संबंधी कुछ ही मरीज देखे गए।
अस्पताल में बच्चों के सिरप अन्य दवाओं की कमी
इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे वायरल पीड़ित बच्चों के लिए दवा भी कम पड़ रही है। बुधवार को बच्चों के कफ सिरप समेत अन्य रोगों की दवा का अभाव रहा। कुछ मरीजों को दवा लिखी गई। पर्चा लेकर काउंटर पर पहुंचे तो उन्हें दवा खत्म होने की जानकारी मिली। सीएमएस डॉ. इंतजार हुसैन ने बताया कि फिजिशियन न होने से संबंधित दवा कम मंगाई जा रही है। बृहस्पतिवार को दवा स्टोर से मंगा लेंगे। अमर उजाला ब्यूरो