शल्य चिकित्सा विभाग के वैज्ञानिक मंगवा रहे सामग्री, पशुओं को लगाए भी जाएंगे कृत्रिम अंग
बरेली। राष्ट्रीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में अगले साल से पशुओं के कृत्रिम अंग बनने शुरू हो जाएंगे। इसके लिए आईवीआरआई के शल्य चिकित्सा (सर्जरी) विभाग के वैज्ञानिकों ने दिल्ली, जयपुर सहित कई जगहों से प्लास्टिक सहित अन्य सामग्री मंगाना शुरू करा दिया है। वैज्ञानिक ट्रेनिंग भी ले रहे हैं। इससे पशुओं के पैर या हाथ कट जाने पर उनका इलाज होने के साथ इससे पशु मालिकों को भी बड़ी राहत मिलेगी। आईवीआरआई में ही पशुओं को कृत्रिम अंग लगाए भी जाएंगे।
आईवीआरआई के शल्य चिकित्सा विभाग में अभी पशुओं के पैर में खराबी होने पर उन्हें काट दिया जाता है। कृत्रिम अंग तैयार करने की अब तक कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में कुत्ता, बकरी, बिल्ली के साथ गाय और भैंस के हाथ पैर में खराबी या टूटने पर चिकित्सकों के सामने उन्हें काटने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। इससे पशुपालकों को परेशानी के साथ ही पशुओं को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरपाल का कहना है कि आईवीआरआई के वैज्ञानिक काफी समय से यह प्रयास कर रहे थे कि शल्य चिकित्सा में पशुओं के कृत्रिम अंग लगाए जाने का काम भी प्रारंभ हो। इसके लिए काफी समय से वैज्ञानिक प्रयासरत थे। दिल्ली, जयपुर सहित कई जगहों से पशुओं के कृत्रिम अंग बनाने के लिए प्लास्टिक और मेटल की सामग्री मंगवा ली गई है। अब चिकित्सक इसकी ट्रेनिंग भी ले रहे हैं कि पशुओं के कटे अंगों की नापजोख के साथ उन्हें किस तरह से तैयार किया जाए। वैज्ञानिकों का दावा है कि आईवीआरआई में पशुओं के कृत्रिम अंग लगाने की सुविधा अगले साल से प्रारंभ हो जाएगी।
30 लाख रुपये से बनाया गया मॉड्युलर ऑपरेशन रूम
आईवीआरआई के शल्य चिकित्सा विभाग में जानवरों के ऑपरेशन के लिए मॉड्युलर आपरेशन रूम तैयार किया गया है। इसकी दीवार स्टील से बनी है, ताकि उनकी अच्छी सफाई के साथ संक्रमण से बचाव किया जा सके। इसमें जानवरों के लिए एक्स-रे मशीन, ऑक्सीजन सिलिंडर सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।
आईवीआरआई के वैज्ञानिकों की कोशिश है कि अगले साल से पशुओं में कृत्रिम अंग लगाने की सुविधा प्रारंभ हो जाए। इसके लिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है। - डॉ. अमरपाल, विभागाध्यक्ष (शल्य चिकित्सा), आईवीआरआई