कुर्रिया कलां (शाहजहांपुर)। गांव कुर्रिया कलां में शनिवार सुबह मिट्टी की ढांग गिरने से नौ वर्षीय बालक की मौत हो गई। जबकि एक ग्रामीण घायल हो गया। दिवाली से एक दिन पहले बालक की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया है। वहीं शाम को तहसीलदार पुष्पेंद्र सिंह, नायब तहसीलदार ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार को ढांढ़स बंधाया और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
थाना कांट क्षेत्र के गांव कुर्रिया कलां निवासी सत्यपाल के घर दिवाली को लेकर घर में पीली मिट्टी से लिसाई का काम चल रहा था। उनका नौ वर्षीय बेटा भोले शनिवार सुबह करीब गांव के पश्चिम तालाब के किनारे मिट्टी लेने गया था। मिट्टी की ढांग के नीचे थोड़ा अंदर जाकर वह मिट्टी खोदने लगा, वहीं गांव का 30 वर्षीय बुलाकी भी मिट्टी खोदने आ गया। अचानक मिट्टी की ढांग गिर गई। इससे मलबे के नीचे भोले पूरी तरह से दब गया। जबकि बुलाकी भी गर्दन तक दब गया। उसके चीखने पर आसपास खेतों में मौजूद लोग आ गए। जैसे-तैसे मलबा हटाकर पहले बुलाकी को बाहर निकाला गया। इसके बाद मलबे में गहरे में दबे भोले को बाहर निकाला गया लेकिन भोले की तब तक सांसे थम चुकीं थीं। जानकारी मिलते ही परिवार के लोग भी रोते-बिलखते मौके पर पहुंच गए और मृत अवस्था में भोले को घर लिए गए। वहीं इस घटना में घायल बुलाकी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराए बिना अंतिम संस्कार कर दिया।
दिवाली से पहले सत्यपाल के घर में मच गया कोहराम
कुर्रिया कलां। दिवाली को लेकर घर में खुशी का माहौल था। इसीलिए लिसाई-पुताई का काम चल रहा था लेकिन सत्यपाल और उसकी पत्नी किरन को क्या मालूम था कि जो बेटा लिसाई के काम में मदद कर रहा है, उसकी जान चली जाएगी। पल भर में दिवाली की खुशियां काफूर हो गईं।
नौ वर्षीय बेटे भोले के शव से लिपटकर रो रही मां किरन बस एक ही बात कह रही थी कि कोई मेरे लाल का लौटा दे। कुछ ऐसा ही हाल सत्यपाल का भी था। भाई 14 वर्षीय मिथुन, 12 वर्षीय बहन लली, 10 वर्षीय शिल्पी और पांच वर्षीय भाई विशेष के भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। त्योहार पर भोले की मौत पर गांव के लोग भी गमगीन थे। मेहनत मजदूरी करके परिवार का पेट पालने वाले सत्यपाल कभी बेटे के शव को देखकर बिलखने लगते तो कभी गुमसुम हो जाते। बिलख रहे परिवार को हर कोई ढांढस बंधा रहा था। संवाद