बरेली। बेटियां पढ़ाई के दौरान ही स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं। अपनी कमाई से फीस भरने के साथ ही वह परिवार की भी मदद कर रही हैं। वह अन्य महिलाओं को भी साथ जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही हैं। कई छात्राएं अपने स्टार्टअप को बढ़ावा दे रही हैं।
वेस्ट टू आर्ट से चल पड़ी गाड़ी
पीएचडी के इंट्रेंस की तैयारी कर रहीं नीतू महिला समूह के माध्यम से कमाई भी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले मठरी का काम शुरू किया। इस समय एनजीओ के माध्यम से वेस्ट टू आर्ट का काम कर रही हैं। इसमें पुराने कपड़ों का थैला बनाकर बेचती हैं। इस कार्य में करीब आठ सौ महिलाओं को जोड़ चुकी हूं।
डिजाइनर कैंडल के काम से कमा रहीं नाम
रुहेलखंड विश्वविद्यालय से बीएमएस कर रहीं रिया ने हाल ही में अपना स्टार्टअप शुरू किया है। वह बताती हैं कि उन्होंने एक साल पहले डिजाइनर कैंडल का काम शुरू किया था। अब वह कॉलेज व फीस और अपना खर्च स्वयं उठा रही हैं। अब वह अन्य महिलाओं को काम देकर इसे आगे बढ़ाना चाहती हैं।
अचार बढ़ा रहा स्वावलंबन का स्वाद
पुराने शहर की तनुश्री ने महिला समूह के माध्यम से अचार बनाने का कार्य शुरू किया। उन्होंने बताया कि बीएड की पढ़ाई की फीस भी इसी कार्य से होने वाली आय से भरी है। अन्य महिलाओं को भी साथ जोड़ा है। अचार को एक ब्रांड बनाकर बाजार में उतारने का स्वप्न है।