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खतरा बरक रार.. 95 फीसदी संक्रमित लक्षण रहित

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demo photo - फोटो : अमर उजाला
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दूसरे राज्यों से आ रहे लोगों में नहीं मिल रहे लक्षण, डॉक्टर चिंतित

बरेली। कोरोना संक्रमण जिस तेजी से फैल रहा है, उससे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की चिंता बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग की ट्रेसिंग रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रमितों में करीब 95 फीसदी एसिम्प्टोमैटिक यानी लक्षण रहित हैं। संक्रमितों के लिए भले ही यह राहत की बात हो, लेकिन दूसरे लोगों के लिए ये साइलेंट एक्टिव कैरियर बने हुए हैं।
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चिकित्सकों के मुताबिक, बगैर लक्षण वाले संक्रमितों से मिललने में लोग परहेज भी नहीं करते हैं, लिहाजा उनके संपर्क में आने वालों की तादाद अधिक हो सकती है। संदिग्ध मानकर लिए जा रहे ज्यादातर सैंपल निगेटिव और जिन्हें स्वस्थ माना जा रहा है वे संक्रमित मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने प्रत्येक लक्षण रहित व्यक्ति से 14 दिनों के भीतर संपर्क में आए लोगों की जानकारी लेने के निर्देश सर्विलांस टीमों को दिए हैं, लेकिन संक्रमित इसमें सहयोग नहीं कर रहे हैं। इससे सर्विलांस टीमें और शुरूआत से ही कोरोना पर नजर रख रहे डॉक्टर संक्रमण की दर में तेजी आने की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि अभी बरेली माइल्ड स्ट्रेन की चपेट में है। अगर, मुंबई, नागपुर, पुणे आदि से नई स्ट्रेन आई तो एसिम्प्टोमैटिक स्थिति बेकाबू कर सकते हैं।

इक्का-दुक्का लोगों में ही स्पष्ट हो रहे लक्षण

स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव को प्रतिदिन ट्रेसिंग की रिपोर्ट भेजी जा रही है। सीएमओ डॉ. सुधीर गर्ग की ओर से भेजी जा रही रिपोर्ट में जो अस्पताल में भर्ती हैं, उन्हें छोड़कर अन्य सभी को लक्षण रहित बताया गया है। सर्विलांस टीम के मुताबिक कोरोना जांच कराने पहुंच रहे लोगों से फार्म भरवाने के दौरान ही लक्षण आदि की जानकारी ली जाती है। ज्यादातर खुद को लक्षण रहित ही बताते हैं। जांच में संक्रमित मिलने पर जब उनसे कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के लिए पूछताछ होती है तो वे कुछ बताने को तैयार नहीं होते हैं।

स्थिति काबू करने का लॉकडाउन ही विकल्प

संक्रामक रोग चैप्टर के अध्यक्ष रहे डॉ. अतुल अग्रवाल ने एसिम्टोमैटिक की संख्या अधिक होने से आने वाले दिनों में बड़े खतरे की आशंका जताई है। उनके मुताबिक पिछले साल कोरोना की शुरूआत में भी ज्यादातर एसिम्प्टोमैटिक ही मिल रहे थे। वहीं, जिनमें लक्षण थे उनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आ रही थी। यही वजह रही कि जून और जुलाई में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े। उन्होंने आने वाले दिनों में सभी त्योहार कोविड प्रोटोकॉल के तहत ही मनाने का सुझाव दिया है। साथ ही, सरकार से होली के बाद करीब सात दिन का लॉकडाउन लगाकर कड़ाई से पालन कराने का सुझाव दिया है।

संवेदनशील राज्यों से आएं तो पहले जांच कराएं

चेस्ट फिजीशियन डॉ. पुनीत अग्रवाल के मुताबिक, दक्षिण भारत के राज्यों में जो स्ट्रेन हावी हुई हैं वे पिछले साल सामने आईं स्ट्रेन से दोगुनी प्रभावी हैं। सीवियर स्ट्रेन लोगों को चपेट में ले रही है। बरेली में अभी वह स्ट्रेन नहीं है, इसलिए लोगों में कोरोना के लक्षण स्पष्ट नहीं है। आशंका जताई कि आने वाले दिनों में जब संवेदनशील राज्यों में रह रहे लोग बरेली लौटेंगे तो स्ट्रेन भी उनके साथ आएगी, जो स्थिति को गंभीर बनाएगी। उन्होंने संवेदनशील राज्यों से आने वालों को पहले जांच कराने और रिपोर्ट मिलने के बाद ही घर जाने का सुझाव दिया है। ताकि लोगों को लॉकडाउन का सामना न करने पड़े।
जांच में ज्यादातर लक्षण रहित संक्रमित मिल रहे हैं, यह स्थिति बेहद गंभीर है। लोगों से अपील है कि वे अगर किसी संक्रमित के संपर्क में हैं, या उनमें लक्षण हैं तब खुद ही जांच केंद्र पर पहुंचकर जांच करा लें। ताकि संक्रमण को काबू किया जा सके। बीमारी को छिपाना अपराध है। - डॉ. सुधीर गर्ग, सीएमओ
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