बरेली। तीन दिन से लापता अपने बेटे की तलाश कर रहे पिता को अचानक पता चला कि पुलिस किसी युवक का अंतिम संस्कार करा रही है। वह यही सोच कर रोते हुए श्मशान घाट पहुंचा था कि जलाई जा रही लाश कहीं उसके बेटे की न हो। उसका शक सही निकला। जलती चिता पर उसके बेटे आरिफ की लाश थी। चप्पल और कपड़ों से पहचान कर पिता ने अंतिम संस्कार रोका और अधजली लाश अपने घर ले गए। पुलिस की इस लापरवाही से आक्रोशित लोगों ने नेशनल हाईवे पर सराय चौकी घेर ली और पुलिस पर पत्थर फेंके। पुलिस ने भीड़ को लाठी फटकार कर खदेड़ा।
किला के मोहल्ला जखीरा निवासी सब्बन खां ने अपने 24 वर्षीय पुत्र आरिफ को गलत संगत में पड़ने पर डांट दिया था। इससे खफा आरिफ बीस अगस्त को घर से लापता हो गया और उसने किला इलाके में ही हुसैन बाग क्रासिंग के पास ट्रेन से कटकर जान दे दी। किला चौकी के दरोगा सुभाष यादव ने 21 अगस्त को उसका शव अज्ञात युवक के रूप में बरामद किया और पंचायतनामा पर भी हिन्दू लिख दिया। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने भी उसी पर मुहर लगा दी। पुलिस अज्ञात के रूप में 72 घंटे बाद रविवार दोपहर शव अंतिम संस्कार के लिए सिटी श्मशान घाट लेकर आई। उधर, बेटे की तलाश में थाने के चक्कर काट रहे सब्बन खां पोस्टमार्टम हाउस भी पहुंचे तो उन्हें स्वीपर ने मृतक का हुलिया बताते हुए शव श्मशान घाट ले जाने की बात कही। इस पर सब्बन श्मशान घाट की और दौड़े, यहां उसकी चिता जल गई थी। तभी सब्बन ने कपड़ों और चप्पल से जलती चिता रोककर मृतक की शिनाख्त आरिफ के रूप में की। साथ में गए लोगों के सहयोग से सब्बन देर शाम अधजला शव अपने घर ले आए और धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी। यह वाकया पता लगने पर आसपास के लोग भड़क गए और पुलिस पर जानबूझकर मुस्लिम युवक को हिन्दू बताकर शव जलावाने का आरोप लगाते हुए सराय चौकी घेर ली। यहां काफी संख्या में पुलिस भी आ गई। सामने से कटघर मोहल्ले की तरफ से पुलिस पर पत्थर फेंके गए। इस पर पुलिस ने पब्लिक को लाठियां फटकारते हुए खदेड़ दिया। इसके बाद मोहल्ले की गलियों में सर्च भी की।
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अज्ञात युवक की ट्रेन से कटने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया था। 72 घंटे बाद शिनाख्त न होने पर डॉक्टरों के हिन्दू बताने पर उसका अंतिम संस्कार कराया जा रहा था। अब युवक की शिनाख्त आरिफ के रूप में की गई है। फिर भी डीएनए टेस्ट कराया जाएगा।
- डीएस मार्छाल, सीओ द्वितीय