पत्नी-बेटे को स्कूल जाने से रोका
सुबह तक ठगों के सामने स्क्रीन पर ही कमरे में बंद संजय ने कहा कि उनकी पत्नी शिक्षिका और बेटा आठवीं कक्षा का छात्र है। इन दोनों को जाने दिया जाए। तब ठगों ने धमकाया और कहा कि घर से बाहर कोई नहीं जाएगा। संजय ने बताया कि बेटे तन्मय पर शातिरों का ज्यादा ध्यान नहीं था।
तन्मय अखबार और सोशल मीडिया पर डिजिटल अरेस्ट के बारे में पढ़ चुका था। इसलिए उसने इशारों में उन्हें ठगों से सावधान रहने को कहा। फिर तकनीकी दिक्कत बताकर एकाध बार कॉल कट की गई। ठगों ने जो एप डाउनलोड कराए थे, उनमें से भी कुछ तन्मय ने डिलीट कर दिए।
फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजकर कब्जे में लिया
संजय ने एसपी सिटी को बताया कि शातिर ठगों ने पुणे न्यायालय का फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजकर संजय को उनके घर में बंधक बना लिया। जिला न्यायालय पुणे जेएम अनुराग सेन के नाम से गिरफ्तारी वारंट बनाकर संजय के नंबर पर भेजा गया। वारंट में संजय की पत्नी रोशी सक्सेना पर आतंकवादियों से फोन पर बात करने के आरोप लगाए थे। रोशी पर जासूसी के भी आरोप लगाए। देश की सूचनाओं को लीक करने जैसे गंभीर आरोप थे। बीएनएस की कई धाराओं का जिक्र भी वारंट में था तो परिवार सहम गया।
डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं होता, सावधान रहें
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि प्रेमनगर थाने की साइबर टीम ने संजय के खाते में जमा छह लाख रुपये को ठगी होने से बचाया। इसलिए टीम को 10 हजार नकद इनाम देकर पुरस्कृत किया गया है। संजय की ओर से मामला भी दर्ज किया है ताकि आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जा सके।
वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस अधिकारी बताने वालों से सावधान रहें। डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं होता है। अपनी निजी जानकारी शेयर न करें। संदिग्ध गतिविधि होने पर 112 और साइबर ठगी होने पर 1930 पर तुरंत सूचना दें।