सबसे खाऊ विभाग यानी पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली की ये तो केवल बानगी है। पीडब्ल्यूडी में सड़क मरम्मत के नाम पर करोड़ों के बंदरबांट की तैयारी चल रही है। विभिन्न योजनाओं में 138 सड़कों की मरम्मत एवं नवीनीकरण के लिए मिले बजट की टेंडर प्रक्रिया में स्वीकृत एस्टीमेट से कम आइटम रखे गए हैं। मनमानी टेंडर प्रक्रिया पर ठेकेदारों के विरोध के बाद मंडलायुक्त ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
पीडब्ल्यूडी को डा. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में चार, रामशरण दास ग्राम सड़क योजना में 10, जिला योजना में पांच, राज्य सड़क निधि में 80, सामान्य मरम्मत से नवीनीकरण में छह और 13 वें वित्त आयोग से 33 सड़कों की मरम्मत को 28.44 करोड़ का बजट मिला है। इस बजट से 244.080 किलोमीटर तक सड़कों की मरम्मत से नवीनीकरण का काम 31 मार्च तक पूरा होना है। इन कामों के जो टेंडर निकाले हैं, उनकी बिल ऑफ क्वांटिटी में स्वीकृत एस्टीमेट से आधे से भी कम आइटम रखे गए हैं। गड्ढा भराई, पत्थर की रोड़ी और पटरी की मिट्टी से संबंधित आइटम हटाकर कोलतार बिछाकर मरम्मत की खानापूरी करने योजना बनाई गई। पीडब्ल्यूडी में हर साल 31 मार्च तक सड़क मरम्मत के नाम पर बजट इसी तरह ठिकाने लगता है। छह महीने में सड़क फिर पुरानी स्थिति में पहुंच जाती है।
‘सड़क मरम्मत के टेंडरों में भारी घपला है। हम सब कमिश्नर साहब से मिले थे। उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं। ठेकेदारों ने टेंडरों का बहिष्कार कर रखा है। हम कोई भी टेंडर नहीं खरीदेंगे।’- अब्दुल कयूम अंसारी, महामंत्री, बरेली कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन
‘टेंडर में कम आइटम रखे गए ताकि ठेकेदार के काम धीमे करने पर उसे दूसरे ठेकेदार से कराया जा सके। फिर भी ठेकेदारों को आपत्ति है तो उनसे बात की जाएगी।’ संजीव भारद्वाज, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड
ठेकेदारों ने किया बहिष्कार
पीडब्ल्यूडी कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने सड़क मरम्मत के टेंडरों का बहिष्कार कर दिया। 27 जनवरी टेंडर बिक्री की आखिरी तारीख थी। 29 जनवरी को टेंडर खुलेंगे। हालांकि इसी बीच कुछ ठेकेदारों के टेंडर खरीदने की भी चर्चा रही। बहिष्कार के चलते एक बार टेंडर प्रक्रिया एक बार आगे भी बढ़ाई जा चुकी है।