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एफओ ने लखनऊ में खोला विवि में धांधली का चिट्ठा

Sat, 27 Dec 2014 01:21 AM IST
बरेली
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में वर्षों से जारी वित्तीय अनियमितताओं का कच्चा चिट्ठा वित्त अधिकारी (एफओ) भानु प्रकाश ने शुक्रवार को शासन को सौेंप दिया। राज्य के प्रमुख सचिव के निर्देश पर विशेष सचिव (वित्त) जेपी सिंह ने इन्हें ब्योरों के साथ बुलाया था। एफओ ने शासन से अनुरोध किया कि उनके कार्यकाल में हुए वित्तीय कार्यों की जांच करा ली जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वह परिसर में काम करने के लिए यह तैयार हैं, बशर्ते भयमुक्त और सुरक्षा वाला माहौल मुहैया हो। कुलपति ने भी शासन को ताजा स्थिति से अवगत करा दिया है। दोनों का पक्ष सुनने के बाद शासन जल्द ही कोई कार्रवाई कर सकता है।
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शासन को सौंपे चिट्ठे में सबसे प्रमुख ताजा प्रकरण गोपनीय मुद्रण संबंधी करीब 51 लाख रुपये का है। इसमें मुद्रित सामग्री का ब्योरा, मुद्रण की दर, उसके आदेश, टेंडर और अन्य प्रक्रिया के सवाल के जवाब में कोई वाउचर या दस्तावेज उपलब्ध कराने की बजाय रजिस्ट्रार की लिखित टिप्पणी का उल्लेख भी है। उन्होंने लिखा है कि गत 45 वर्षों से ऐसे ही भुगतान होता रहा है जिसका आशय यह है कि ऐसे मुद्रण का सर्टिफिकेशन रजिस्ट्रार करते हैं और भुगतान का आदेश कुलपति करते हैं। वित्त अधिकारी उनके निर्देश पर सिर्फ चेक जारी कर देता है और नियमावली आदि के आधार पर उन पर कोई आपत्ति नहीं करता। यही नहीं, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया के लिए जेनरेटर किराया के मद में पौने पांच लाख रुपये और कूलर किराया के मद में करीब तीन लाख रुपये के भुगतान का आदेश दिया गया जबकि इनके लिए कोई टेंडर हुए ही नहीं थे। नियमानुसार साल में एक मद में टुकड़ों में ही काम हुआ हो लेकिन अगर वह कुल एक लाख रुपये या उससे अधिक का है तो उसके लिए टेंडर होना अनिवार्य है। शासकीय नियमों की कसौटी पर वित्त अधिकारी की यह आपत्ति भी विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारियों को नहीं सुहाई थी। लखनऊ से लौटने के क्रम में वित्त अधिकारी ने बताया कि उन्होंने अपना पक्ष शासन के समक्ष रख दिया है और इससे अधिक उन्हें प्रकरण में कोई जानकारी नहीं है।
उधर कुलपति प्रो. मुशाहिद हुसैन ने बताया कि उन्होंने विश्वविद्यालय के माहौल के बारे में शासन को बता दिया है। राजभवन में राज्यपाल के साथ हुई वार्ता में भी उन्होंने विश्वविद्यालय के हालात के बारे में जिक्र किया है।
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