बाबूजी नाटक की प्रस्तुति आज, रामपाल यादव होंगे फेस्ट का आकर्षण
बरेली। थिएटर फेस्ट में चौथे दिन हिंदी और बुंदेलखंडी जुबान में बुना ‘झलकारी’ म्युजिकल ड्रामा का मंचन हुआ, जो झलकारी बाई के जीवन पर आधारित है। राही थिएटर मुंबई की इस प्रयोगात्मक नाट्य प्रस्तुति में निर्देशक नेहा सिंह ने कम पात्रों के माध्यम से अधिक पात्रों का एहसास कराने का शानदार प्रयास किया। जिसे दर्शकों ने भी अपनी तालियों से सराहा।
यह वही झलकारी बाई है जो एक दलित और गरीब परिवार में पैदा हुई और नियति को धता बताकर अपनी मेहनत और संघर्ष से झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की सहयोगी बनी। उसे रानी ने महिलाओं की दुर्गा फौज का कमांडर बना दिया था। यह नाटक 1857 के आजादी से पहले के संघर्ष के बारे में जाने और अनजाने तथ्यों को सामने लाता है। साथ ही रानी लक्ष्मीबाई और झलकारी बाई के अदम्य साहस और उनकी मैत्री का अद्भुत नमूना पेश करता है।
इसमें पात्रों को निभाने वालों में दीपिका पांडेय, वैष्णवी आरपी, भारती, पुनरवासु, आशुतोष शुक्ला, मधुर खंडेलवाल, आशुतोष सिंह रहे। संगीत पुरनवासु मालवीय का रहा। दया दृष्टि चैरिटेबिल ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस महोत्सव के मुख्य अतिथि कमिश्नर रणवीर प्रसाद रहे। ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. ब्रजेश्वर सिंह ने उनका स्वागत किया। नाटक की निर्देशक को मुख्य अतिथि ने स्मृति चिन्ह एवं दीप्ति ढींगरा ने शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। डॉ. ब्रजेश्वर ने बताया कि बृहस्पतिवार को राजपाल यादव खास आकर्षण होंगे।
निर्देशक की बात
बकौल नाटक निर्देशक नेहा सिंह आज के दौर में इतिहास के नायकों को जानने की जरूरत है। आजादी के आंदोलन की ऐसी कितनी कहानियां है जो समय के पन्नों में बिखरी हुई हैं। इसी में झलकारी बाई की जिंदगी की अनूठी दास्तां और झांसी की रानी से उसके रिश्ते की कहानी भी है। इस नाटक में बुंदेलखंडी लोकसंगीत के साथ कलिरापट्टू का समावेश खासतौर से बच्चों को ध्यान में रखकर किया गया है।