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‘वाल्मीकि तुलसी भये, तुलसी राधेश्याम’

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बरेली। काव्यात्मक शैली से रामायण की रचना कर बरेली को आलोकित करने वाले पं. राधेश्याम कथावाचक की जयंती पर सोमवार को संजय कम्युनिटी हॉल में पं. राधेश्याम कथावाचक स्मृति समारोह का शुभारंभ हो गया। सात दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम के पहले दिन पं. राधेश्याम कथावाचक के लिखे नाटक ‘लक्ष्मण रेखा’ का मंचन हुआ। डीएम नितीश कुमार ने पंडित जी के साहित्य की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। फिर मां सरस्वती के समक्ष दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। पं. अरविंद ने पं. राधेश्याम जी की रचनाओं का गायन कर दर्शकों को भक्ति रसधार से सराबोर किया।
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पंडित जी द्वारा रचित राधेश्याम रामायण के प्रसंग सीता हरण से प्रस्तुत ‘लक्ष्मणरेखा’ नाटक का बड़ा ही मार्मिक मंचन सुभाषनगर रामलीला कमेटी के कलाकारों ने किया। दर्शाया कि लक्ष्मण ने सुर्पनखा की नाक-कान काटने के बाद खर-दूषण के पास जाती है लेकिन श्री राम उनका वध कर देते हैं। इसके बाद भाई रावण के पास पहुंचकर पूरी व्यथा बताती है। खर-दूषण को मारने वाले को नारायण स्वरूप समझकर वह राक्षस जाति के उद्धार के लिए सीता हरण का संकल्प कर मारीच को भेजता है। रावण भेष बदलकर माता सीता से भिक्षा मांगता है माता सीता जब उसे दीक्षा देती हैं तो रावण उन्हें पकड़ने आगे बढ़ता है। लेकिन लक्ष्मण रेखा से उत्पन्न आग से भयभीत होकर पीछे हटता है। फिर माता सीता को रेखा के पार आकर भिक्षा देने को कहता है। माता सीता जैसे ही लक्ष्मण रेखा पार करती हैं रावण योगी भेष बदलकर राक्षस रूप में आ जाता जब श्रीराम और लक्ष्मण कुटिया पर पहुंचते हैं तो वह सीता जी की खोज में निकल पड़ते हैं।
इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष धनश्याम शर्मा एडवोकेट समेत गिरधर गोपाल खंडेलवाल, पंडित काशीनाथ शर्मा, शारदा भार्गव, कुलभूषण शर्मा, डीएन शर्मा, डॉ. विमल भारद्वाज, समयून खान, आशीष गुप्ता, दानिश जमाल आदि मौजूद रहे।
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