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इज्जतनगर, चौपुला, राजेंद्र नगर की फिजा में घुला सबसे ज्यादा ‘जहर’

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बरेली। पटाखों से निकलने वाले जहरीले कण और गैसों से शहर की फिजा इस दिवाली भी जहरीली हुई है। इज्जतनगर, चौपुला और राजेंद्र नगर इलाके की स्थिति सबसे ज्यादा खराब मिली है। यहां वातावरण में प्रदूषण का स्तर चार से पांच गुना तक मिला है। पिछले साल भी कमोबेश यही स्थिति मिली थी। यही नहीं सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रिट ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों की मात्रा भी खतरनाक स्थिति में है। एक्सपर्ट के अनुसार वातावरण में करीब एक सप्ताह तक यही स्थिति बनी रह सकती है।
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दिवाली की रात इज्जतनगर रेलवे क्रॉसिंग के क्षेत्र में पार्टीकुलेट मैटर (पीएम-2.5) की मात्रा 297 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मिली, जो दस दिन पहले 190 थी, जबकि इसकी सामान्य मात्रा 60 तक है। पीएम-10 की मात्रा यहां 601 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मिली, जो दस दिन पहले 311 थी। इसकी सामान्य मात्रा 100 तक मानी जाती है। यानी यहां सामान्य से छह गुना ज्यादा प्रदूषण मिला। चौपुला में पीएम 2.5 की मात्रा 281 और राजेंद्र नगर में 278 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मिली, जबकि पीएम 10 चौपुला पर 592 और राजेंद्र नगर में 558 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मिला।
पर्यावरणविद डॉ. डीके सक्सेना ने बताया कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण का स्तर मापा गया तो यह स्थिति सामने आई है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य के लिए सबसे खतरनाक पीएम 0.1 की मात्रा भी बढ़ी है। हालांकि उपकरण न होने के कारण इसे मापा नहीं जा सका। मौसम ठंडा और कोहरा होने के कारण वातावरण में यह कण एक सप्ताह से ज्यादा वक्त तक रह सकते हैं। बच्चे और बुजुर्ग सुबह बाहर निकलने से परहेज करें। मॉर्निंग वॉकर हो सके तो मास्क पहनकर बाहर निकलें।
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पार्टीकुलेट मेटर (पीएम-2.5)
क्षेत्र 17 अक्तूबर 27 अक्तूबर
कुतुबखाना 83 165
डेलापीर 155 237
राजेंद्र नगर 135 278
इज्जत नगर 190 297
कुहाड़ापीर 105 188
श्यामगंज 125 246
चौपला 180 281
यूनि. रोड 135 149
सेटेलाइट 198 259
कैंट 156 193
कुतुबखाना 113 230
मॉडल टाउन 103 203
पार्टीकुलेट मेटर (पीएम-10)
क्षेत्र 17 अक्तूबर 27 अक्तूबर
कुतुबखाना 158 255
डेलापीर 249 539
राजेंद्र नगर 249 558
इज्जत नगर 311 601
कुहाड़ापीर 165 307
श्यामगंज 183 441
चौपला 301 592
यूनि. रोड 245 406
सेटेलाइट 303 597
कैंट 289 405
कुतुबखाना 198 290
मॉडल टाउन 187 540
दो दिन में सांस संबंधी रोगियों की संख्या बढ़ी
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अजय मोहन के अनुसार शहर में पिछले दो दिनों से जमकर पटाखे फूट रहे हैं, जिसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल में पिछले दों दिन में सांस संबंधी 46 रोगी भर्ती हुए हैं। उन्होंने बताया कि इसमें दमा के मरीजों की संख्या ज्यादा है, क्योंकि प्रदूषण बढ़ने से उनको ज्यादा दिक्कत महसूस हुई, उनको भी एडमिट किया गया है। उन्होंने बताया कि मौसम में नमी होने के कारण प्रदूषण के कण कुछ दिन तक वातावरण में बने रह सकते हैं। इसलिए बाहर निकलने से परहेज करें या मुंह पर मॉस्क लगा लें। कुछ दिन मॉर्निंग वाक से परहेज करें।
गिलास के नीचे पटाखा रखकर फोड़ा, बाहर निकल गई बच्चे की आंख
पटाखे फोड़ने से कई हादसे भी हुए। कई मामले जिला अस्पताल में भी पहुंचे। करीब दस साल का एक बच्चा जिला अस्पताल पहुुंचा। किसी ने पटाखा गिलास के नीचे रखकर फोड़ दिया। गिलास भी फट गया, जिसके टुकड़े पास में ही खड़े एक बच्चे के मुंह पर लगे। उसकी नाक कट गई और एक आंख भी बाहर निकल आई। उसे जिला अस्पताल लाया गया। हालांकि बाद में परिवार के लोग उसे निजी अस्पताल ले गए। वहीं पटाखे से जलने के आठ मामले जिला अस्पताल पहुंचे। उनका उपचार किया गया।
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