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डॉ. भगवान शरण भारद्वाज और सुरेश बाबू मिश्रा को साहित्य भूषण सम्मान

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बरेली। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के वर्ष 2018 के पुरस्कारों पर शुक्रवार को निर्णय ले लिया गया। इसमें बरेली कॉलेज में हिंदी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. भगवान शरण भारद्वाज और सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेश बाबू मिश्रा को साहित्य भूषण सम्मान के लिए चुना गया है। यह निर्णय वर्ष 2018 में प्रकाशित पुस्तकों के आधार पर लिया गया है।
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आलोचना, इतिहास, निबंध, काव्य समेत कई विधाओं में किया काम
सिंधुनगर निवासी डॉ. भगवान शरण भारद्वाज बरेली कॉलेज में हिंदी के विभागाध्यक्ष, कार्यवाहक प्राचार्य, रुहेलखंड विश्वविद्यालय में आर्ट्स फैकल्टी के डीन और 80 के दशक में संघ के महानगर संघचालक रहे हैं। उन्होंने समीक्षा, आलोचना, इतिहास, शोध-प्रबंध, दर्शन, संस्कृति और काव्य समेत हिंदी की कई विधाओं में कार्य किया है। पांचाली, शोध स्वर, ग्वालबाल, युवामन, मधुमती समेत कई पत्रिकाएं संपादित की हैं और संस्कृत पत्रिकाओं में 300 से ज्यादा लेख प्रकाशित हुए हैं। उनके निर्देशन में दर्जन भर से ज्यादा पीएचडी भी हुई हैं। डॉ. भारद्वाज की बेटी डॉ. दीप्ति भारद्वाज ने बताया कि पिता अस्वस्थ होने के चलते दो साल से बिस्तर पर हैं और उन्हें सम्मान दिलाने के सारे प्रयास उनके शिष्यों ने ही किए हैं।

सुरेश बाबू ने लिखीं दस पुस्तकें
वर्ष 1980 से 2017 तक शिक्षा विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे सुरेश बाबू मिश्रा राजकीय हाईस्कूल के प्रधानाचार्य पद से रिटायर हैं। सहमा हुआ शहर, लहू का रंग, थरथराती लौ, बलिदान की कहानियां, अविष्कार की कहानियां, संघर्ष का विगुल, जमीन से जुड़े लोग, साकार होते सपने, उजाले की किरन, जानलेवा धुआं, उनके कहानी, लघु उपन्यास, एकांकी और नाटक संग्रह हैं। वह 1984 से लेखन कार्य कर रहे हैं और अब तक लगभग सौ कहानियां एवं 150 लेख प्रकाशित हो चुके हैं। उत्कृष्टता के लिए उन्हें विभिन्न सामाजिक संस्थाएं सम्मानित कर चुकी हैं।
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