मेडिकल वेस्ट का निस्तारण कराने के लिए लगाए गए प्लांट में अस्पताल और क्लीनिक सामान्य कचरा ही भेज रहे हैं। इसे प्लांट तक पहुंचाने के लिए दोनों सिनर्जी वेस्ट प्लांटों में सिर्फ एक-एक छोटे आकार की गाड़ी है जो अस्पतालों से बीस फीसदी से भी कम मेडिकल वेस्ट ले जा रही है। सीटीपी मेडिकल वेस्ट में प्लास्टिक, कांच की शीशी, इंजेक्शन सिरिंज, कटे अंग नहीं निकल रहे हैं।
श्मशान गृह से आगे लगे सिनर्जी वेस्ट प्लांट को एसएनजी मरकनटाइन प्रा. लिमिटेड चला रही है। एजेंसी के पास मेडिकल वेस्ट उठवाने के लिए सिर्फ 70 अस्पताल पंजीकृत हैं। अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट उठाने के लिए एजेंसी के पास पिकअप जैसा छोटा एक वाहन है। जो रोजाना औसतन 150 से दो सौ किलो कचरा पहुंचाता है। इस कचरे में मेडिकल वेस्ट (प्लास्टिक, कांच की शीशी, सिरिंज, इंजेक्शन, प्लास्टर आदि) 20 फीसदी से भी कम होता है।
प्लांट के संचालक संजीव मिश्रा का कहना है कि ज्यादातर अस्पताल एजेंसी से मेडिकल वेस्ट न उठवाकर फीस बचा रहे हैं। जिन अस्पतालों या क्लीनिकों से रोजाना जितना कचरा आ भी रहा है, उनमें ईंट पत्थरों समेत सामान्य कचरा ही निकलता है। परसाखेड़ा एसटीपी प्लांट के संचालक ऋषि कपूर के मुताबिक दो साल पहले प्लांट पर दो सौ से ज्यादा अस्पताल कचरा भेजते थे। अब ये संख्या घटकर 80 से भी कम रह गई है। एक भी डेंटल अस्पताल सिनर्जी प्लांट से मेडिकल वेस्ट निस्तारित नहीं कराता।
कोट
अस्पतालों में दो तरह का कूड़ा होता है। मेडिकल वेस्ट और सॉलिड वेस्ट। दोनों वेस्ट एक में मिला नहीं सकते। अगर अस्पताल ऐसा कर रहे हैं तो गलत है। इसे नियंत्रित करने के प्रयास किए जाएंगे। -सच्चिदानंद सिंह अपर नगर आयुक्त