फर्जी पासबुक बनाई
बताते हैं कि वर्ष 2019 तक सब ठीक चला। एजेंट ने लोगों की जमा रकम वापस भी की, लेकिन उसके बाद फर्जी पासबुक दिखाकर लोगों के खाते खोलने लगी। कई वर्ष तक लोगों से रकम जमा करने के बाद जब उनकी एफडी व आरडी पूरी होने का समय आया तो रकम देने के नाम पर उन्होंने टालमटोल शुरू कर दिया। कुछ दिन बाद महिला ने आत्महत्या कर ली।
महिला की संपत्ति जब्त करने की मांग
प्रेमनगर के कृष्ण मोहन ने बताया कि महिला ने अपने बेटे के खाते में लोगों से ऑनलाइन पेमेंट लेना शुरू कर दिया था। चेक देने पर वह लेने से मना कर देती थी। नकद व क्यूआर कोड के जरिये रकम जमा करने के लिए कहती थी। विश्वास की वजह से लोग नकद व क्यूआर कोड पर भुगतान करते रहे। उनके पास इसके स्क्रीन शॉट भी मौजूद हैं। लोगों का आरोप है कि महिला ने आत्महत्या से पहले कुछ संपत्ति भी खरीदी थी। लोगों ने उसे जब्त करने की मांग की है।
38 लाख रुपये तक की ठगी की
महिला एजेंट ने प्रेमनगर के लोगों से सबसे ज्यादा 38 लाख रुपये की ठगी की। एक महिला ने बताया कि महिला एजेंट ने उनकी मां के नाम पर सात हजार रुपये प्रतिमाह का खाता खोला था। इसके पूरा होने पर उन्हें 38 लाख रुपये मिलने थे। जनवरी में जब समय पूरा होने पर उन्होंने महिला से रकम मांगी तो वह आनाकानी करने लगी। इसी तरह मीना सक्सेना के 15 लाख, स्नेहलता के 13.50 लाख, उमेंद्र जैन के 3.5 लाख रुपये समेत करोड़ों की रकम महिला ने ठग ली।