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Bareilly News: ठंड कम पड़ने से तेजी से बढ़ी फसलें, प्रभावित होगी उपज

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बरेली। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता प्रभावित होने से इस वर्ष सर्दियाें में ठिठुरन के दिन बीते वर्ष के सापेक्ष कम रहे। जिसका प्रभाव फसलों की उपज पर पड़ सकती है। कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक गलन और कोहरे वाले दिन घटने से उपज में प्रति एकड़ 20 फीसदी कमी का अनुमान है।
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आईवीआरआई कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह के मुताबिक इस वर्ष रबी मौसम की फसल, सब्जियां तापमान ज्यादा होने से प्रभावित हुई हैं। सामान्य रूप से 15 नवंबर से तापमान में गिरावट शुरू होती है। दिसंबर, जनवरी, फरवरी तक मौसम ठंडा रहता है। अधिकतम तापमान 10-15 डिग्री, न्यूनतम 6-10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, लेकिन इस वर्ष तापमान में बेहद कम समय के लिए औसत गिरावट रही। दिसंबर के आखिरी सप्ताह से जनवरी दूसरे सप्ताह तक कड़ाके की ठंड पड़ी। घना कोहरा 10 दिन ही रहा।



दिसंबर गर्म रहने से और जनवरी में तापमान अधिक होने से गेहूं, सरसों, राई, मसूर, गोभी, मटर, पालक, मेथी, टमाटर, बैंगन, आलू की पैदावार प्रभावित रही। गेहूं में कल्लों की संख्या कम हुई। इसलिए उपज भी कम होगी।
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गर्म रहेगी फरवरी, बालियों में दाने होंगे कम और छोटे

डॉ. रंजीत के मुताबिक जनवरी के बाद फरवरी में भी तापमान सामान्य से अधिक रहा तो बाली जल्दी आएगी। दाने कम और जो आएंगे वे भी छोटे रह जाएंगे। सरसों में जल्दी फूल आने लगे हैं, उत्पादन पर असर होगा। मार्च में और अधिक तापमान हो जाएगा। लिहाजा, कीट के प्रकोप से फसलों में बीमारियों का प्रकोप भी होगा। इससे निजात के लिए किसानों की लागत भी बढ़ेगी। अमर उजाला ब्यूरो
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