बरेली। पिछले कई वर्षों से सिस्टम रबर फैक्टरी की जमीन पर कब्जा लेने के लिए कागजी घोड़े दौड़ा रहा है, लेकिन न्यायालयों में लंबित पैरवी के लिए कोई ठोस कदम ही नहीं उठाया। राज्य सरकार की ओर से कोई पक्षकार मौजूद न होने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने वादी अल केमिस्ट को सुनकर फैक्टरी की जमीन व अन्य संपत्ति पर कब्जा दिलाने के आदेश रिसीवर को दे दिए। बॉम्बे हाईकोर्ट ने आठ सप्ताह में सारी संपत्ति सौंपने का आदेश 19 अक्तूबर को दिया था, इसके बावजूद अब तक शासन की ओर से संबंधित न्यायालय में पुनर्विचार के लिए याचिका तक दायर नहीं की गई है। उधर, निजी कंपनी के अधिकारी रबर फैक्टरी की जमीन पर कब्जा लेने को अगले सप्ताह पहुंच रहे हैं।
अल केमिस्ट कंपनी को रबर फैक्टरी की संपत्तियां सौंपने के आदेश के बारे में प्रशासन और शासन को कई दिन बाद पता चला था। क्योंकि रबर फैक्टरी मामले में कागजी कार्रवाई हो रही थी इसलिए बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी नहीं हो पाई और वहां चल रही गतिविधियों का पता ही नहीं चला। जबकि केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार जुटे हुए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से रबर फैक्टरी की जमीन पर सरकारी कब्जा लेने के लिए कानूनी पैरवी कराने का आग्रह किया था। ताकि फैक्टरी की जमीन पर इंडस्ट्रियल हब बन सके और अन्य औद्योगिक गतिविधियां शुरू हो जाएं। इससे हजारों लोगों को रोजगार और निवेशकों को उपयुक्त भूमि मिलने की संभावना जताई गई थी। वेब के जरिये बैठक करके और पत्राचार के माध्यम से भी केंद्रीय मंत्री ने मामला उठाया।
मुख्यमंत्री ने इसके बाद संबंधित विभागीय अफसरों से प्रभावी कार्रवाई कराने को कहा। इसके तहत ही शासन ने तीन माह पहले तीन सितंबर को विशेष सचिव (अवस्थापना व औद्योगिक विकास) डॉ. मुथुकुमारसामी बी. को नोडल अफसर नामित किया। राज्य सरकार ने वर्ष 1999 से बंद फैक्टरी की भूमि पर कब्जा यानी पुनर्प्रवेश व स्वामित्व प्रक्रिया शुरू कराई। औद्योगिक विकास अनुभाग-3 से जारी आदेश में कब्जा लेने की प्रक्रिया समयबद्ध रुप से सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही निर्देश दिया गया कि नामित नोडल अफसर बरेली के डीएम को अपेक्षित सहयोग करेंगे। इस कवायद से लगा था कि जल्द ही शासन रबर फैक्टरी पर कब्जा ले लेगा। लेकिन फाइल इधर-उधर दौड़ती रही और स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। रबर फैक्टरी मामले में यूपीसीडा को नोडल एजेंसी नामित किया लेकिन उसके भी अफसर चुप ही बैठे रहे।
तीन माह में एक भी बैठक नहीं
बंद रबर फैक्टरी भूमि पर कब्जा यानी पुनर्प्रवेश व स्वामित्व प्रक्रिया अपनाने के लिए शासन ने करीब तीन माह पहले आदेश दिए थे। मगर मनमानी की स्थिति यह है कि एक दिन भी नामित नोडल अफसर बरेली नहीं आए और न ही कोई बैठक बुलाई। इस कारण बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित मामले में सक्षम अधिकारी अथवा अधिवक्ता भी पैरवी करने के लिए नामित नहीं हो सके। इसलिए प्रदेश सरकार (शासन) न्यायालय में लंबित प्रकरण में पार्टी तक नहीं बन पाई। अधिवक्ताओं द्वारा मांगे गए निर्धारित शुल्क और अन्य खर्चे भी नहीं दिए गए। पैरवी के लिए खर्चे किस मद से दिए जाएं, इसकी फाइल इधर-उधर दौड़ाई गई।
अल केमिस्ट कंपनी को कब्जा दिलाने बरेली आएंगे रिसीवर
बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित रबर फैक्टरी प्रकरण में प्रदेश सरकार अब तक पक्षकार नहीं बन पाई। जबकि बॉम्बे हाईकोर्ट 19 अक्तूबर को वादी अल-केमिस्ट असेस्ट रिकंसट्रक्शन कंपनी को आठ सप्ताह में रबर फैक्टरी जमीन पर कब्जा देने का आदेश दे चुका है। हाईकोेर्ट ने रिसीवर एनबी ठक्कर से इस आदेश का पालन कराने को कहा है। वादी अल केमिस्ट ने फैक्टरी की 1380.23 एकड़ भूमि, प्लांट, भवन, मशीनें आदि पर दावा किया था। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक अल-केमिस्ट असेस्ट रिकंसट्रक्शन कंपनी को 14 दिसंबर तक रबर फैक्टरी की सारी संपत्ति सौंपा जाना है। इस आदेश का पालन कराने के लिए रिसीवर एनबी ठक्कर इसी सप्ताह बरेली पहुंचेंगे, उनके पहुंचने के दिन ही अल-केमिस्ट अधिकारियों के आने की सूचना है। इसके बाद फैक्टरी संपत्ति पर भौतिक कब्जा दिलाया जाएगा।
- वर्ष 1958 में रबर फैक्टरी की स्थापना प्रक्रिया शुरू हुई
- 1700 एकड़ जमीन सिर्फ 3.2 लाख रुपये में लीज पर दी
- 90 साल तक लीज पर आवंटन
- 29 अप्रैल 1961 में उत्पादन शुरू
- 147 करोड़ रुपये लोन लिया गया
- लोन नहीं चुकाने पर बढ़ता गया बोझ
- 1380 एकड़ मौजूदा क्षेत्रफल
- 1370 कर्मचारी कार्यरत थे
- 15 जुलाई 1999 को तालाबंदी
- फैक्टरी भूमि पर कानूनी कब्जा लेने के लिए 03 सितंबर 2020 को नोडल अफसर नामित
- बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 अक्तूबर को वादी के पक्ष में जमीन पर कब्जा दिलाने को आदेश दिए
- मंडलायुक्त ने जांच के आदेश दिए, तहसील प्रशासन ने दो दिसंबर को रिपोर्ट सौंप दी
पिछले कई वर्षों से रबर फैक्टरी की जमीन और संपत्तियोें पर वैधानिक कब्जा लेने के लगातार प्रयास हो रहे हैं। हमने मुख्यमंत्री से टेक्सटाइल पार्क बसाने और रबर फैक्टरी की भूमि पर औद्योगिक गतिविधियां शुरू कराने का आग्रह किया था। ताकि यहां इंडस्ट्रियल हब बन सके। इसके तहत ही सरकार ने रबर फैक्टरी का वाद निपटाने के लिए नोडल अफसर नामित कर दिया। अफसरों ने अपनी भूमिका सही नहीं निभाई, इसलिए शासन लंबित मामले में पक्षकार नहीं बन पाया। हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया, इसे आठ सप्ताह में लागू होना है। सात सप्ताह बीत गए हैं, मंडलायुक्त और डीएम से प्रभावी पैरवी और बॉम्बे हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने को कहा है। - संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री
बॉम्बे हाईकोर्ट ने वादी अल केमिस्ट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी को आठ सप्ताह में बरेली स्थित रबर फैक्टरी की 1380.23 एकड़ भूमि सौंपने का आदेश दिया है। सात सप्ताह बीत चुके हैं, 14 दिसंबर तक कंपनी को रबर फैक्टरी जमीन और संपत्ति सौंपना है। हाईकोर्ट आदेश का पालन इसी सप्ताह करा दिया जाएगा। प्रदेश सरकार को इस पर पुनर्विचार याचिका दायर करने का अधिकार है। -एनबी ठक्कर, रिसीवर
न्यायालय में लंबित प्रकरण पर सार्वजनिक तौर कुछ नहीं कहा जा सकता है। रबर फैक्टरी की भूमि की पैमाइश रिपोर्ट मिल गई है। बरेली के हित में बेहतर कार्य करने का प्रयास किया जा रहा है। -रणवीर प्रसाद, मंडलायुक्त