मजदूर ने सरे बाजार हिस्ट्रीशीटर को मार दी गोली
- फोटो : Workers shot dead Surrey bazaar historic
गांव बरसेर में लगने वाली साप्ताहिक बाजार में उड़द बेचने आए हिस्ट्रीशीटर मंजीत को उसके साथ आए दिहाड़ी मजदूर ओमवीर ने गोली मार दी। इससे मौके पर भगदड़ मच गई। इसके बाद मजदूर तमंचा लहराता हुआ भाग गया। हालांकि, बाद में कांबिंग कर उसे गिरफ्तार कर लिया। उधर, सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल हिस्ट्रीशीटर को पहले रामनगर सीएचसी पहुंचाया, जहां उससे तहरीर ली गई। उसने विश्वेश्वर सिंह उर्फ मटल्ले, ओमप्रताप, संजय, कौशल, अवधेश, विरमू और ओमवीर के खिलाफ दस लाख की रंगदारी मांगने और जानलेवा हमले की बात लिखकर दी। इसके बाद उसे बरेली के लिए रेफर कर दिया गया। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। घटना की वजह पता नहीं चल पाई। हालांकि, पकड़े जाने के बाद ओमवीर ने बताया कि मंजीत लगातार उसका और उसके परिवार का उत्पीड़न कर रहा था। इसी वजह से उसने हमला किया। जानकारी के मुताबिक, गांव लिलौर सहसा निवासी हिस्ट्रीशीटर मंजीत सिंह शहर में रहता है। वह गांव आता जाता रहता है। उस पर 45 मुकदमे दर्ज है। मंगलवार को वह अपने दिहाड़ी मजदूर ओमवीर सिंह के साथ बरसेर बाजार में उड़द की दाल बेचने गए थे। साथ में तमंचा भी ले गए थे। उन्हाेंने तमंचा मय कारतूस नौकर ओमवीर सिंह को दे दिया। इसके बाद मंजीत दाल का सौदा करने लगे। इसी दौरान ओमवीर ने पीछे से मंजीत को गोली मार दी और तमंचा लहराता हुआ भाग गया। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे सीओ और कोतवाल ने मंजीत को इलाज के लिए बरेली भेज दिया। इसके बाद कांबिंग कर ओमवीर को तमंचे के साथ गिरफ्तार कर लिया।
उधर, ओमवीर को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। उसने पुलिस को बताया कि मंजीत ने उसका और उसके परिवार का जीना हराम कर रखा था। उसकी दहशत पूरे गांव में है। ओमवीर ने बताया कि वह काफी समय से मंजीत के यहां मजदूरी कर रहा था। इसके बावजूद मंजीत उसे और उसके परिवार को परेशान करता था। नौ साल पहले गांव से भागी वाल्मीकि परिवार की एक लड़की के मामले में भी उसे झूठा फंसा दिया था। इसके बाद केस वापस कराने के नाम पर उसकी जमीन बिकवाकर रकम हड़प ली। ओमवीर का आरोप है कि उससे दिन-रात काम कराया जाता था। उसकी पत्नी के जेवर भी बिकवा दिए। ओमवीर ने बताया कि वह इससे तंग आ चुका था। हद तो यह हो गई कि मंजीत उसके पिता से पैर दबवाने लगा। साथ ही पिटाई भी करने लगा। इसके बाद उसने बदला लेने का फैसला कर लिया। पहले भी वह जान लेने की कोशिश कर चुका था पर असफल रहा। उसने बताया कि पहले कभी गोली नहीं चलाई थी, इसलिए चूक गया और मंजीत सिर्फ घायल हुआ।