जेल के बंदी की मौत हो जाने के बाद कर्मचारी उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंच गए। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित करने के बाद शव को मोर्चरी में रखवा दिया। परिवार वालों ने बंदी की मौत को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया। उनका कहना था कि जेल अफसरों की लापरवाही से बंदी की मौत हुई है। पोस्टमार्टम में मौत की वजह हार्टअटैक आई है।
फतेहगंज पश्चिमी के ठिरिया खेतल गांव के निवासी 60 वर्षीय वीरेंद्र छह साल से हत्या के आरोप में जिला जेल में बंद थे। बुधवार सुबह 6:40 पर बंदी वीरेंद्र को मृत अवस्था में जिला जेल लाया गया था। जेल प्रशासन के मुताबिक बंदी हाईपरटेंशन का मरीज था, उसका इलाज चल रहा था। सुबह जेल खुलने के समय वह बेहोशी की अवस्था में मिला। उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। सूचना मिलने पर बंदी के बेटा महेंद्र और परिवार वाले जिला अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने जेल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। उनका कहना था कि जेल खुलने के बाद वीरेंद्र को देखा गया। इससे पहले उनकी देखभाल अस्पताल के किसी कर्मचारी ने नहीं की। उसके पिता पीडब्लूडी में ऑपरेटर पद पर काम करता थे। जेल अधीक्षक दधिराम मौर्य ने बताया कि वीरेंद्र हाईपरटेंशन का मरीज का था। उसे जेल से चिकित्सकों की निगरानी में रखकर इलाज कराया जा रहा है। जिला चिकित्सालय में में भी कई बार उसे इलाज के लिए भेजा गया। दवा खाने में वीरेंद्र हीलाहवाली करता था। रात में खा पीकर आराम से सोया था। सुबह बेहोशी की हालत में मिला और उसकी मौत हो गई। परिवार वालों ने उनसे तो कोई शिकायत नहीं की है। पोस्टमार्टम के बाद शव उनके सुपुर्द करा दिया है।